LPG Crisis : मिडिल ईस्ट जंग रूकी गई... जानिए भारत में कब होगी सिलेंडरों की सप्लाई तेज
punjabkesari.in Wednesday, Apr 08, 2026 - 06:19 PM (IST)
नेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच 7-8 अप्रैल को घोषित दो हफ्तों के संघर्षविराम (सीजफायर) ने वैश्विक स्तर पर राहत की सांस दी है। 28 फरवरी को शुरू हुए सैन्य तनाव के बाद पहली बार हालात में नरमी आई है। इस समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सीमित और नियंत्रित आवागमन की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े दबाव में कुछ कमी आने की उम्मीद है।
नियंत्रित रहेगा होर्मुज से आवागमन
हालांकि, यह राहत पूरी तरह से बिना शर्त नहीं है। ईरान के 10-सूत्रीय संघर्षविराम ढांचे के तहत ‘नियंत्रित आवागमन प्रोटोकॉल’ लागू रहेगा, जिसका संचालन ईरानी सशस्त्र बल करेंगे। यानी जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर तेहरान का नियंत्रण बना रहेगा। ऐसे में इसे पूरी तरह खुला और स्वतंत्र समुद्री मार्ग नहीं माना जा सकता।
भारत में LPG सप्लाई अभी भी दबाव में
सीजफायर से पहले भी भारत सतर्क रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा था। भारतीय झंडे वाले आठ LPG टैंकर होर्मुज पार कर चुके हैं और खाड़ी में फंसे जहाजों को प्राथमिकता दी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘सी बर्ड’ नाम का एक जहाज 2 अप्रैल को लगभग 44,000 मीट्रिक टन LPG लेकर मंगलुरु पहुंचा, जहां अनलोडिंग जारी है। इसके अलावा, भारत ने अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की छूट के तहत ईरान से कच्चे तेल और LPG का आयात फिर से शुरू कर दिया है।
आपूर्ति में ढांचागत कमी बनी चुनौती
इन प्रयासों के बावजूद, देश में LPG आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। भारत अपनी कुल LPG जरूरत का केवल 40 प्रतिशत ही घरेलू स्तर पर उत्पादन करता है, जबकि 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। इसमें भी करीब 90 प्रतिशत आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। ऐसे में 39 दिनों तक बाधित रही सप्लाई चेन का सामान्य होना समय लेगा।
थिंक टैंक ORF के अनुसार, आपातकालीन उपायों और उत्पादन में 25 प्रतिशत वृद्धि के बावजूद LPG उपलब्धता सामान्य स्तर के मुकाबले काफी कम रही। टैंकरों की आवाजाही शुरू होने के बाद हालात में सुधार तो हुआ है, लेकिन स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है।
सप्लाई सामान्य होने में लग सकते हैं 3-6 हफ्ते
उद्योग के जानकारों का मानना है कि अगर संघर्षविराम कायम रहता है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है, तो अगले तीन से छह हफ्तों में LPG सप्लाई धीरे-धीरे स्थिर हो सकती है। इससे एजेंसियों के पास स्टॉक बढ़ेगा और ब्लैक मार्केट पर भी लगाम लगेगी। हालांकि, अगर हालात फिर बिगड़ते हैं, तो संकट और गहरा सकता है।
सरकार ने बढ़ाया राहत का दायरा
इस बीच, 7 अप्रैल को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने प्रवासी मजदूरों के लिए 5 किलोग्राम वाले ‘फ्री ट्रेड LPG सिलेंडर’ के दैनिक कोटे को दोगुना करने का फैसला किया है, ताकि जरूरतमंदों तक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। फिलहाल, देश में रसोई गैस की सप्लाई को लेकर उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इसकी स्थिरता अब अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली आगामी वार्ताओं पर निर्भर करेगी।
