जालंधर में विद्या भारती उत्तर क्षेत्र की शैक्षिक परिषद की तीन दिवसीय कार्यशाला सफलतापूर्वक संपन्न हुई
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 05:23 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कार्यशाला में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा जी, विद्या भारती उत्तर क्षेत्र के संगठन मंत्री विजय नड्डा जी तथा विद्या भारती पंजाब के संगठन मंत्री राजेंद्र कुमार जी, महामंत्री संदीप धूड़िया जी एवं उत्तर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाँचों प्रांतों के प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उत्तर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पाँचों प्रांतों- जम्मू (11), पंजाब (15), हिमाचल (13), हरियाणा (12) एवं दिल्ली (14) - से अधिकारीगण, शैक्षिक प्रभारी एवं प्रमुखों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला में कुल 65 सहभागियों ने भाग लिया, जिनमें 26 बहनें सम्मिलित रहीं। अपेक्षित संख्या 117 थी। तीन दिनों में कुल 11 सत्रों का आयोजन किया गया। समापन सत्र में विभिन्न प्रांतों से आए प्रतिभागियों द्वारा अपने अनुभव साझा किए गए।
राधिका जी (जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख) ने अपने अनुभव रखे। कुलदीप जी (हिमाचल प्रदेश) ने कहा कि कार्यशाला से विषयों की स्पष्टता हुई तथा करणीय कार्यों की पहचान हुई, जिन्हें वे अपनी योजनाओं में लागू करेंगे। सुरेंद्र सिंह जी (पंजाब) ने कहा कि उन्हें नया सीखने को मिला और ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।

संजीव कुमार जी (हरियाणा) ने कविता के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किए। उत्पल जी (दिल्ली, पूर्व छात्र) ने कहा कि व्यवस्थाएं अत्यंत उत्तम रहीं। उन्होंने विद्या भारती की सरलता, सहजता और विशिष्ट कार्यशैली की सराहना करते हुए बताया कि यह उनका पहला अनुभव था।
डा. शिक्षा शर्मा जी (जम्मू) ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर शालिनी जी (दिल्ली) द्वारा एकल गीत "देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें" प्रस्तुत किया गया, जिसे सभी ने भावपूर्ण सराहना के साथ सुना।
कार्यशाला के समापन सत्र में विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के महामंत्री देशराज शर्मा जी ने मार्गदर्शन देते हुए कहा कि कुछ विद्यालय एवं प्रांत उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं, किंतु केवल कुछ विद्यालयों की गुणवत्ता के आधार पर संस्था अपने लक्ष्य को प्राप्त नहीं कर सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी के लिए सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही विद्या भारती की मूल मान्यता है। विद्यालय का उत्कृष्ट परिणाम उसकी विशेषता नहीं, बल्कि उसका स्वभाव होना चाहिए, क्योंकि यही विद्यालय का मूल कार्य है।
शर्मा जी ने कहा कि सौंपे गए दायित्वों में सभी की भूमिका सुनिश्चित करनी होगी। हम केवल एक एडवाइजरी कमेटी नहीं, बल्कि एक सक्रिय थिंक टैंक हैं, जिसे कार्य के माध्यम से परिणाम दिखाने हैं। योग्य लोगों को जोड़कर मजबूत रचना खड़ी करनी होगी तथा Outcome को ध्यान में रखते हुए योजना एवं गतिविधियाँ बनानी होंगी। उन्होंने इनोवेशन बेस्ड एवं क्लासरूम बेस्ड कार्य, क्रिया शोध की आदत विकसित करने तथा लक्ष्य एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के गहन अध्ययन पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि विद्या भारती केवल पुस्तक और पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है, बल्कि बालक के समग्र विकास के लिए कार्य करती है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आवश्यक गुणात्मक परिवर्तन संभव है, ऐसा उन्हें पूर्ण विश्वास है। कार्यशाला के अंत में श्री संदीप धूड़िया जी द्वारा सभी अतिथियों, सहभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
