बहन कभी मां नहीं बन सकती थी… फिर ट्रांसजेंडर भाई ने उठाया ऐसा कदम, जिसने बदल दी किस्मत

punjabkesari.in Sunday, Jan 04, 2026 - 11:03 PM (IST)

नेशनल डेस्क: एक ट्रांसजेंडर इन्फ्लुएंसर ने अपनी बहन को मां बनने में मदद करने के लिए जो फैसला लिया, वह न सिर्फ भावनात्मक था बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण भी। यह कहानी है ट्रांसजेंडर इन्फ्लुएंसर केनी एथन जोन्स की, जिन्होंने अपनी बहन के लिए अपनी जेंडर ट्रांजिशन प्रक्रिया तक को अस्थायी रूप से रोक दिया।

बहन की उम्मीद तब टूटी, जब मां बनना नामुमकिन लगा

केनी की बहन कई सालों से गर्भधारण की कोशिश कर रही थी, लेकिन हर बार उसे गर्भपात का सामना करना पड़ा। चार साल की इस जद्दोजहद ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया। आखिरकार उसने बच्चा गोद लेने या फिर एग डोनेशन जैसे विकल्पों पर विचार करना शुरू किया। इसी दौरान केनी ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा, जिसने पूरी कहानी की दिशा बदल दी।

ट्रांसजेंडर भाई ने किया एग्स डोनेट करने का फैसला

केनी एथन जोन्स, जिनका जन्म एक लड़की के रूप में हुआ था, लंबे समय से खुद को पुरुष मानते हैं और पिछले 10-11 सालों से टेस्टोस्टेरोन हार्मोन थेरेपी पर थे। लेकिन बहन की मदद के लिए उन्होंने अपने एग्स डोनेट करने का फैसला किया। इसके लिए उन्हें हार्मोन थेरेपी रोकनी पड़ी, जिससे उनका जेंडर ट्रांजिशन कुछ समय के लिए थम गया।

जेंडर डिस्फोरिया का डर और मानसिक संघर्ष

हार्मोन थेरेपी रोकना केनी के लिए आसान नहीं था। उन्हें डर था कि पीरियड्स, शारीरिक बदलाव और अपने शरीर के उन हिस्सों को फिर से महसूस करना जेंडर डिस्फोरिया को ट्रिगर कर सकता है। उन्होंने बताया कि दोबारा एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रभाव में जाना उनके लिए मानसिक रूप से बेहद असहज था और इस सफर का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता था।

जटिल और असुविधाजनक मेडिकल प्रक्रिया

केनी ने टेस्टोस्टेरोन थेरेपी अस्थायी रूप से रोककर एग रिट्रीवल की प्रक्रिया शुरू की। इसके लिए उन्हें कई हफ्तों तक रोजाना दवाइयां और हार्मोन इंजेक्शन लेने पड़े। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए एक विशेष केयर प्लान बनाया और एस्ट्रोजन सप्रेसेंट दवाएं दीं, ताकि जेंडर डिस्फोरिया का खतरा कम किया जा सके। केनी के मुताबिक, यह प्रक्रिया उनकी सोच से कहीं ज्यादा गहन और कठिन थी।

जांच में निकली राहत की खबर

हार्मोन थेरेपी के लंबे इस्तेमाल के कारण केनी को अपनी प्रजनन क्षमता पर खुद भी शक था। लेकिन जांच के बाद यह सामने आया कि उनकी फर्टिलिटी अभी भी अच्छी है। यह खबर उनके और उनकी बहन-दोनों के लिए राहत लेकर आई, क्योंकि अब मां बनने की एक ठोस उम्मीद दिखने लगी थी।

19 एग्स, 6 भ्रूण और नई उम्मीद

फर्टिलिटी क्लिनिक में विशेषज्ञों ने केनी से 19 एग्स कलेक्ट किए, जिनसे 6 भ्रूण तैयार हुए। इन भ्रूणों में से एक को उनकी बहन के गर्भ में ट्रांसफर किया जाएगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद केनी को हार्मोनल असंतुलन का सामना करना पड़ा, लेकिन इस पूरी यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा करने पर उन्हें गर्व और सुकून दोनों महसूस हुआ।

यह कहानी सिर्फ मेडिकल साइंस की नहीं, बल्कि रिश्तों, त्याग और बिना शर्त प्यार की मिसाल भी है—जहां एक ट्रांसजेंडर भाई ने अपनी बहन के मां बनने के सपने को सच करने के लिए खुद की तकलीफ को पीछे रख दिया।


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News Editor

Parveen Kumar

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