सिद्धारमैया का हुंकार: केवल कांग्रेस ही बना सकती है दलित मुख्यमंत्री , BJP-JDS को दी खुली चुनौती!
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 12:07 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने रविवार को अपने सोशल जस्टिस और जाति व्यवस्था पर लिखे गए लेख का पुरजोर बचाव किया। विपक्षी दलों BJP और JD-S पर तीखा हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस ही वह पार्टी है जिसने उनके जैसे पिछड़ी जाति के नेताओं को पहचान दी और उन्हें सशक्त बनाया।

विवाद पर सिद्धारमैया का रुख
'सोशल डे' के अवसर पर लिखे गए अपने लेख पर शुरू हुई राजनीतिक बहस का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "अगर पानी एक जगह रुका रहे तो गंदा हो जाता है, लेकिन बहता रहे तो साफ रहता है। हमारी सामाजिक व्यवस्था भी अगर लचीली और गतिशील रहे, तभी वह जनहितैषी बन सकती है। मैं अपने लेख पर हो रही चर्चा का स्वागत करता हूँ।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि सामाजिक न्याय पर बात करना उनके लिए नया नहीं है, बल्कि वह पिछले चार दशकों से इस पर अडिग रहे हैं। उन्होंने विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा, "मैं उन नेताओं से कहीं ज्यादा जाति व्यवस्था को समझता हूँ जो मेरी आलोचना कर रहे हैं। मैं इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस के लिए तैयार हूँ।"

Congress vs BJP-JD-S
सिद्धारमैया ने कांग्रेस की समावेशी राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में वोक्कालिगा, लिंगायत, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों के नेताओं को शीर्ष पदों पर पहुँचाने का काम केवल कांग्रेस ने किया है। अपना उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा "कांग्रेस ने मुझ जैसे पिछड़ी जाति के व्यक्ति को पहचाना और दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर दिया। इसके लिए मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी का आभारी हूँ।"
दलित मुख्यमंत्री पर बड़ा बयान: उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा, "अगर भविष्य में राज्य का मुख्यमंत्री कोई दलित बनता है, तो वह केवल कांग्रेस पार्टी के माध्यम से ही संभव होगा। क्या भाजपा या जेडीएस ऐसा सोचने की हिम्मत भी कर सकते हैं?"

कुमारस्वामी और देवगौड़ा पर 'परिवारवाद' का तंज
केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी द्वारा लगाए गए आरोप कि सिद्धारमैया ने कुर्सी के लिए 'जाति कार्ड' खेला है,पर सीएम ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कुमारस्वामी और उनके पिता एचडी देवगौड़ा पर कटाक्ष करते हुए कहा "कुमारस्वामी का यह कहना कि मैंने कुर्सी के लिए जाति का सहारा लिया, एक मजाक की तरह है। वे जातिवादी नहीं, बल्कि 'परिवारवादी' हैं। उनके लिए उनकी जाति महज एक वोट बैंक है।"
