सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण और पोरबंदर का गौरवशाली योगदान
punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 09:03 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय संस्कृति के राष्ट्रीय स्वाभिमान और अजेय आस्था के प्रतीक प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ महादेव के सान्निध्य में 8 से 11 जनवरी तक ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का भव्य उत्सव मनाया जा रहा है। इस उत्सव में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए सोमनाथ की धरा पर पहुंच रहे हैं। ऐसे में, पोरबंदर के जाने-माने इतिहासकार श्री नरोतमभाई पलाण ने इस गौरवशाली इतिहास के पन्नों को खोलकर पोरबंदर के अप्रतिम योगदान के संस्मरणों को याद किया है।
प्रसिद्ध इतिहासकार श्री नरोतमभाई पलाण ने कहा कि जनवरी, 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया था। इस घटना को जनवरी, 2026 में ठीक 1000 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार यह तारीख 6 जनवरी है।

उन्होंने कहा कि सोमनाथ का प्रथम मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है। शुरुआत के 1000 सालों तक यह मंदिर अत्यंत समृद्ध और अटूट रहा, जिसकी ख्याति सुनकर गजनवी ने उस पर आक्रमण किया था। हालांकि, सोमनाथ प्रजा के स्वाभिमान का प्रतीक है। जब-जब इस मंदिर को तोड़ा गया, तब-तब प्रजा और राजाओं ने मिलकर उसे फिर से खड़ा किया। मंदिर का मौजूदा स्वरूप आठवीं बार का पुनर्निर्माण है।
सौराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उछरंगराय ढेबर ने दान एकत्र करने की अपील की थी। श्री नरोतमभाई पलाण ने गर्व से कहा कि सोमनाथ मंदिर के नवनिर्माण के लिए पहला योगदान पोरबंदर ने दिया था।

पोरबंदर के विख्यात शेठ नानजी कालिदास मेहता ने उस जमाने में मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख रुपए का पहला दान दिया था। साथ ही, उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि आवश्यकता पड़ने पर वे और भी दान देने को तैयार हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सनातन धर्म की दृढ़ता और विजय का जयघोष है। पोरबंदर सदैव इस पवित्र कार्य में आगे रहा है, जो हरेक पोरबंदरवासी के लिए गौरव की बात है।
