देश के 6 प्रमुख शनि देव मंदिर, जहां दर्शन मात्र से भी शनि दोष का प्रभाव हो जाता है कम; देखें तस्वीरें
punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 02:06 PM (IST)
नेशनल डेस्क : भारत में भगवान शनि को न्याय का देवता माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में उनके कई प्रसिद्ध मंदिर हैं, जहां श्रद्धालु शनि दोष से मुक्ति और जीवन की बाधाओं को दूर करने की कामना लेकर पहुंचते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही प्रमुख शनि मंदिरों के बारे में सरल भाषा में:
1. तिरुनल्लार शनिश्वर मंदिर, तमिलनाडु
Thirunallar Shani Temple (प्रचलित रूप से तमिलनाडु क्षेत्र से जुड़ा) देश के प्रमुख नवग्रह मंदिरों में गिना जाता है। मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। मंदिर परिसर में स्थित नाल तीर्थम सरोवर में स्नान को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां स्नान करने से पुराने पापों और नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है। हर शनिवार और शनि अमावस्या पर यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

2. शनिचरा मंदिर, मध्य प्रदेश
Shanichara Temple देश के प्राचीन शनि मंदिरों में से एक माना जाता है। कहा जाता है कि यहां स्थापित शनि प्रतिमा उल्कापिंड से बनी है, जो प्राचीन समय में इसी स्थान पर गिरी थी। मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है, जहां श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़कर दर्शन करने होते हैं। यहां शनिवार को विशेष पूजा और तिल के तेल का अभिषेक किया जाता है।

3. बन्नंजे श्री शनि क्षेत्र, कर्नाटक
Bannanje Sri Shani Kshetra कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित है। यहां भगवान शनि की विशाल अखंड प्रतिमा दो-स्तरीय चबूतरे पर स्थापित है, जिससे दूर से भी दर्शन संभव हो सके। यह स्थान Sri Krishna Temple के पास होने के कारण भी प्रसिद्ध है। यहां श्रद्धालु तिल के तेल से अभिषेक कर विशेष पूजा करते हैं।

4. येरदानूर शनि मंदिर, तेलंगाना
Yerdanur Shani Temple में काले पत्थर से निर्मित भगवान शनि की लगभग 20 फुट ऊंची प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा करीब 9 टन वजनी बताई जाती है और 2 फुट ऊंचे आधार पर खड़ी है। श्रद्धालु यहां शनि के अशुभ प्रभावों से बचने और जीवन में स्थिरता के लिए पूजा करने आते हैं।

5. शनि शिंगणापुर मंदिर, महाराष्ट्र
Shani Shingnapur Temple भगवान शनि को समर्पित सबसे प्रसिद्ध तीर्थस्थलों में से एक है। यहां मंदिर की खास बात यह है कि शनि देव की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे स्थापित है — न छत है और न दीवारें। प्रतिमा लगभग 5 फुट ऊंचे काले पत्थर के रूप में चबूतरे पर स्थापित है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह शिला स्वयं प्रकट हुई थी। यहां तेल चढ़ाने और शनिवार की पूजा का विशेष महत्व है। Shani Dham Temple में प्राकृतिक चट्टान से बनी लगभग 21 फुट ऊंची शनि देव की प्रतिमा स्थापित है। इसे विश्व की ऊंची शनि प्रतिमाओं में से एक माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यहां श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन की बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं।

धार्मिक महत्व
ज्योतिष शास्त्र में शनि को कर्मों का न्यायाधीश माना गया है। मान्यता है कि साढ़ेसाती, ढैय्या या शनि दोष के समय इन मंदिरों में पूजा-अर्चना करने से मानसिक शांति मिलती है और कठिनाइयों में कमी आती है। देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित ये मंदिर न केवल आस्था के केंद्र हैं, बल्कि धार्मिक पर्यटन के प्रमुख स्थल भी हैं, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
