सुप्रीम कोर्ट में आम लोगों के मामलों को दी जाएगी तरजीह, CJI सूर्यकांत ने दिए निर्देश
punjabkesari.in Saturday, Nov 29, 2025 - 09:33 PM (IST)
नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने आम लोगों की परेशानियों और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के साथ सुनवाई के दायरे में लाने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कहा कि जहां आम जनता की स्वतंत्रता का प्रश्न हो या तत्काल अंतरिम राहत की मांग हो, ऐसे मामलों को सत्यापन और त्रुटि निवारण के बाद दो कार्यदिवस के भीतर मुख्य या पूरक सूची में शामिल किया जाएगा।
जमानत मामलों में नई प्रक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियमित जमानत, अग्रिम जमानत और जमानत रद्द करने से जुड़े सभी मामलों की प्रति भारत सरकार, राज्य सरकार या केंद्र शासित प्रदेश के संबंधित नोडल अधिकारी या स्थायी वकील को अनिवार्य रूप से भेजनी होगी। इन मामलों में अलग आवेदन दाखिल करना अनिवार्य है, जिसके बिना न तो केस सत्यापित होगा और न ही कोर्ट की सूची में रखा जाएगा। इस पहल का उद्देश्य आम जनता के हित से जुड़े मामलों की सुनवाई को तेज और सुगम बनाना है।
नए मामलों की सूचीबद्धता का शेड्यूल
सुप्रीम कोर्ट ने नए मामलों की सूचीबद्धता को लेकर भी शेड्यूल जारी किया है। अब मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को सत्यापित हुए मामले अगले सोमवार को सूचीबद्ध होंगे, जबकि शुक्रवार, शनिवार और सोमवार को सत्यापित हुए मामले अगले शुक्रवार को रखे जाएंगे। नई व्यवस्था के तहत नए केस अपने आप सूची में आ जाएंगे और वादियों को कोर्ट में अपने मामलों का मेंशन करने की आवश्यकता नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपरोक्त श्रेणी के मामलों में कोई भी उल्लेख स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दहेज प्रथा पर कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रथा पर भी कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जिस विवाह को भारतीय समाज में जीवन का सबसे पवित्र बंधन माना जाता था, वह आज दहेज की वजह से व्यावसायिक सौदे में बदल गया है। कोर्ट ने कहा कि आधुनिक समय में लोग विवाह को उपहार, पैसा और दिखावे के साथ जोड़ देते हैं, जिससे इस रिश्ते की आत्मा कमजोर हो रही है। दहेज को उपहार या परंपरा बताने की कोशिश की जाती है, लेकिन यह वास्तविकता में लालच का रूप ले चुका है।
सुप्रीम कोर्ट की अपील
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह प्रेम, विश्वास और समानता पर आधारित होना चाहिए। अदालत ने युवाओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे मिलकर दहेज के खिलाफ माहौल तैयार करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दहेज तभी समाप्त होगा, जब समाज इसे रिवाज नहीं बल्कि बुराई मानकर खुले मन से इसका विरोध करेगा।
