CJI खुद फंसे साइबर ठगी में! जयपुर सम्मेलन में किया खुलासा – बहन-बेटी को फर्जी मैसेज, नाइजीरिया से चल रहा गिरोह!"
punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 09:57 PM (IST)
नेशनल डेस्क: जयपुर में Rajasthan State Legal Services Authority (RSLSA) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन “Cyber Safety: Awareness, Protection and Inclusive Access to Justice” के उद्घाटन सत्र में भारत के मुख्य न्यायाधीश Justice Surya Kant ने साइबर अपराध के बढ़ते खतरे पर गंभीर चिंता व्यक्त की।
मुख्य न्यायाधीश ने अपने निजी अनुभव साझा करते हुए बताया कि साइबर ठगों ने उनके नाम और सार्वजनिक तस्वीरों का इस्तेमाल कर कई बार फर्जी वेबसाइट्स तैयार कीं। इतना ही नहीं, इन वेबसाइट्स के जरिए उनकी बहन और बेटी तक संदेश भेजे गए। हालांकि संदेशों की भाषा अनुचित नहीं थी, लेकिन यह घटना साइबर अपराध की गंभीरता को दर्शाती है। जांच में यह सामने आया कि कुछ फर्जी साइट्स विदेश, विशेष रूप से Nigeria से संचालित हो रही थीं।
साइबर ठगी बना बड़ा राष्ट्रीय संकट
CJI ने कहा कि साइबर अपराध अब किसी एक व्यक्ति या वर्ग की समस्या नहीं रहा, बल्कि यह “जनसमूह स्तर का खतरा” बन चुका है। उन्होंने गृह मंत्रालय के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में 66 लाख से अधिक साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें लंबित हैं।
उनके अनुसार, आज के ठग कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डीपफेक तकनीक और अन्य आधुनिक डिजिटल टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, जिससे असली और नकली के बीच फर्क करना आम नागरिकों के लिए कठिन होता जा रहा है। उन्होंने साइबर ठगी की तुलना लूट, वसूली और डकैती जैसे अपराधों से की, जो लोगों को आर्थिक ही नहीं बल्कि भावनात्मक और सामाजिक नुकसान भी पहुंचाते हैं।
“Think Before You Click” – डिजिटल दुनिया का मंत्र
मुख्य न्यायाधीश ने पारंपरिक सावधानी के सिद्धांत को डिजिटल युग में लागू करने की अपील करते हुए कहा, “पहले सोचो फिर बोलो, समझो फिर चलो” की तरह ऑनलाइन दुनिया में भी “क्लिक करने से पहले सोचें” सबसे बड़ी सुरक्षा है।
उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका साइबर सुरक्षा को न्याय तक समान पहुंच का अहम हिस्सा मानती है। डिजिटल अरेस्ट जैसी ठगी के मामलों में न्यायालय ने हस्तक्षेप किया है और आगे भी सख्त रुख अपनाया जाएगा।
सम्मेलन का उद्देश्य
यह राष्ट्रीय सम्मेलन साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने, डिजिटल अपराध से बचाव के उपायों और न्याय तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने जैसे विषयों पर केंद्रित है। CJI के वक्तव्य ने स्पष्ट किया कि तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। साइबर खतरे से निपटने के लिए सरकार, न्यायपालिका और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।
