पंडित रघुनाथ मुर्मू जयंती: राष्ट्रपति मुर्मू ने ''ओल चिकी'' लिपि के जनक को किया नमन, बताया संथाली गौरव का प्रतीक

punjabkesari.in Friday, May 01, 2026 - 03:20 PM (IST)

नेशनल डेस्क। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज लेखक रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि अपनी दूरदर्शिता के जरिए उन्होंने संथाली भाषा को एक नई पहचान दी। संथाली भाषा के लिए 'ओल चिकी' लिपि विकसित करने वाले रघुनाथ का जन्म 1905 में ओडिशा के मयूरभंज जिले के रायरंगपुर के पास डांडबोस गांव में हुआ था। 

राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मु की जयंती पर मैं उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हूं। उन्होंने अपनी दूरदर्शिता और सृजनशीलता के द्वारा संथाली भाषा को नयी पहचान दी।'' रायरंगपुर क्षेत्र से ही संबंध रखने वालीं राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, 'ओल चिकी लिपि के माध्यम से संथाली भाषा में शिक्षा, साहित्य और अभिव्यक्ति को बढ़ावा मिला तथा संथाल समुदाय के समग्र विकास को गति मिली।' 

उन्होंने कहा, "उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर हम राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध रहने तथा एक विकसित और समावेशी भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लें।" संथाल समुदाय से संबंध रखने वाले मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा परिसर के पास स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। 

उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, "प्रख्यात संथाली लेखक, महान समाज सुधारक और ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर मेरी ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि। सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने और संथाली भाषा को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान दिलाने में उनका योगदान अतुलनीय है।" 

नेता प्रतिपक्ष नवीन पटनायक ने भी रघुनाथ को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा, "प्रख्यात संथाली कवि और ओल चिकी लिपि के जनक पंडित रघुनाथ मुर्मू की जयंती पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। भाषा और साहित्य को समृद्ध करने के साथ-साथ संथाली समाज के उत्थान में उनका अतुलनीय योगदान सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।"


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Rohini Oberoi

Related News