सुनेत्रा पवार : राजनीतिक नेता की साधारण पत्नी से लेकर महाराष्ट्र की पहली उपमुख्यमंत्री बनने तक का सफर

punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 07:35 PM (IST)

नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक पवार परिवार की छत्रछाया में रहकर राजनीति में कदम रखने वालीं सुनेत्रा पवार शनिवार को राज्य की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बन गईं। इसके साथ ही उनके पति अजित पवार के निधन के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के नेतृत्व की जिम्मेदारी भी सुनेत्रा के कंधों पर आ गई है। राज्यसभा सदस्य सुनेत्रा पवार (62) का भाजपा नेतृत्व वाली राज्य सरकार में नंबर दो पर आसीन होना राकांपा के लिए भी एक नए अध्याय की शुरुआत माना जा रहा है।

बारामती में 28 जनवरी को विमान दुर्घटना में राकांपा अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को शनिवार को राकांपा के विधायक दल का नेता चुना गया और शाम को उन्होंने उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मराठवाड़ा क्षेत्र के धाराशिव (पूर्व में उस्मानाबाद) जिले के तेर गांव से ताल्लुक रखने वालीं सुनेत्रा पवार राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन जीवन के अधिकांश समय तक सक्रिय राजनीति में नहीं उतरी थीं। उनके भाई पदमसिंह पाटिल राकांपा के वरिष्ठ नेता हैं। उनके पिता बाजीराव पाटिल मराठवाड़ा मुक्ति संग्राम में शामिल थे, जो हैदराबाद राज्य के भारतीय संघ में विलय से पहले हुआ था।

'वाणिज्य' विषय में पढ़ाई करने वालीं सुनेत्रा पवार को चित्रकारी, संगीत, फोटोग्राफी और कृषि में रुचि है। शादी के बाद उन्होंने काटेवाडी गांव में सक्रिय रूप से खेती शुरू की। शरद पवार ने 1999 में राकांपा की स्थापना की थी, लेकिन जुलाई 2023 में उनके भतीजे अजित पवार के भाजपा-शिवसेना महायुति सरकार में शामिल होने के बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। इसके बाद अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया और उन्होंने नवंबर 2024 में महायुति गठबंधन की भारी जीत के बाद बनी देवेंद्र फडणवीस सरकार में भी यही पद संभाला।

सुनेत्रा पवार को उनकी वेबसाइट पर एक प्रखर पर्यावरणविद और उद्यमी बताया गया है। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में राजनीति में पदार्पण करते हुए अपने परिवार के गढ़ बारामती से अपनी ननद और राकांपा (एसपी) की मौजूदा सांसद सुप्रिया सुले के खिलाफ चुनाव लड़ा। सुप्रिया सुले से हारने के बाद वह राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुईं। उनके बड़े बेटे पार्थ पवार 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव हारने के बाद राजनीति से दूर हो गए, जबकि छोटे बेटे जय एक उद्यमी हैं। एक ओर जहां अजित पवार ने 1980 के दशक की शुरुआत में राजनीति में कदम रखा, वहीं सुनेत्रा पवार 2024 के आम चुनाव तक राजनीति से मोटे तौर पर दूर रहीं। साल 2010 में उन्होंने 'एंवायरनमेंट फोरम ऑफ इंडिया' (ईएफओआई) की स्थापना की।

ईएफओआई एक गैर-सरकारी संगठन है जो पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील समुदायों के लोगों के लिए काम करता है। उनके नेतृत्व में ईएफओआई ने भारत में 'इको-विलेज मॉडल' को पेश किया, जो ग्रामीण विकास और पारिस्थितिकी को साथ-साथ रखने का अभिनव तरीका है। उन्होंने जैव विविधता संरक्षण, संकटग्रस्त प्रजातियों की सुरक्षा, जल संसाधन प्रबंधन और सूखा राहत अभियानों का नेतृत्व भी किया।

सुनेत्रा पवार शरद पवार द्वारा स्थापित विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी भी हैं और फ्रांस में स्थित 'वर्ल्ड एंटरप्रेन्योरशिप फोरम' के 'थिंक-टैंक' की सदस्य के रूप में उन्होंने सतत विकास और सामाजिक नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने निर्मल ग्राम अभियान के तहत महाराष्ट्र के 86 गांवों में स्वयं-सहायता समूह आंदोलन का नेतृत्व किया, और बारामती के काटेवाडी गांव को 'इको-विलेज' में बदलकर स्वच्छता, स्वास्थ्य, सामुदायिक पशुपालन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा दिया।

सुनेत्रा पवार 'बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क' की चेयरपर्सन भी हैं, जो ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने वाली एक बहु-आयामी कपड़ा निर्माण कंपनी है। इसमें 15,000 से अधिक महिलाएं कार्य करती हैं। सुनेत्रा पवार को राकांपा को एकजुट बनाए रखने, भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ गठबंधन समीकरण को संभाले रखने और राकांपा के दोनों गुटों के विलय के बारे में निर्णय लेने जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना होगा। 


सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Parveen Kumar

Related News