ध्वस्त शिक्षा प्रणाली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन, राहुल गांधी का बड़ा बयान
punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 11:19 PM (IST)
नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश के शिक्षा तंत्र को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर 'Zen G' (Gen-Z) और छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि देश का शिक्षा तंत्र पूरी तरह से ध्वस्त (कोलैप्स) हो चुका है और वर्तमान में शिक्षा बेहद महंगी हो गई है। राहुल गांधी के अनुसार, देश भर में छात्रों द्वारा किया जा रहा आंदोलन इसी मौजूदा चरमराई हुई शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ है।
प्रयागराज में भी उठाएंगे मुद्दा
राहुल गांधी ने बताया कि वे इस गंभीर मुद्दे को पहले भी देहरादून और कोटा में उठा चुके हैं और अब जल्द ही प्रयागराज में भी छात्रों की इस आवाज को बुलंद करेंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चाहे कांग्रेस की सरकार हो, राष्ट्रीय स्तर की सरकार हो या फिर झारखंड की सरकार, सभी सरकारों को छात्रों की समस्याओं को पूरी गंभीरता से सुनना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
भाजपा का तीखा हमला
राहुल गांधी पर "झूठा नैरेटिव" गढ़ने का आरोप राहुल गांधी के इस रुख पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को विपक्ष के नेता पर युवाओं का इस्तेमाल कर अपना राजनीतिक एजेंडा चमकाने और समाज में "झूठा नैरेटिव" गढ़ने का आरोप लगाया। पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी युवाओं के कंधों पर बंदूक रखकर अपनी राजनीति साधना चाहते हैं और समाज में विभाजन के बीज बो रहे हैं।
संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई पर गर्माई राजनीति
दरअसल, यह विवाद तब और गहरा गया जब राहुल गांधी ने हाल ही में उन प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की, जो पेपर लीक मामले को लेकर तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इन छात्रों ने 20 जुलाई को 'संसद मार्च' निकाला था, जिस दौरान उन्हें कथित तौर पर पुलिस की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। इस मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि वे छात्रों के खिलाफ हुई कथित हिंसा के मामले में संसद में जवाब देने का साहस नहीं दिखा पा रहे हैं।
इस आरोप का खंडन करते हुए भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने स्पष्ट किया कि 20 जुलाई के "संसद चलो" मार्च के दौरान किसी भी तरह की गोलीबारी नहीं हुई थी। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ दोहराया कि उस दिन कोई गोली नहीं चली थी।
