AC रूम में बैठने से बिगड़ रही हैं आंखें? हो रही है जलन... छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी, विशेषज्ञों ने बताए कारण और बचाव
punjabkesari.in Sunday, Jun 07, 2026 - 01:47 PM (IST)
नेशनल डेस्क: तेज गर्मी, धूल प्रदूषण और एसी के लगातार इस्तेमाल के चलते गर्मियों में आंखों की ड्राईनेस और जलन की समस्या तेजी से बढ़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में आंखों की प्राकृतिक नमी प्रभावित होती है, जिससे लालिमा, चुभन और खुजली जैसी दिक्कतें आम हो जाती हैं।
केआईएमसी हॉस्पिटल, ठाणे के सीनियर कंसल्टेंट ऑप्थेल्मोलॉजी डॉ. चैतन्य वेमू के मुताबिक बढ़ते तापमान और शुष्क हवा आंखों के आंसुओं के वाष्पीकरण को बढ़ा देती है, जिससे आंखों में ड्राईनेस और जलन की समस्या उत्पन्न होती है। एसी में लंबे समय तक रहने या धूप में बाहर निकलने पर यह परेशानी और बढ़ सकती है।
गर्मियों में आंखों की जलन के प्रमुख कारण
डॉक्टरों के अनुसार ड्राई आई का सबसे बड़ा कारण नमी की कमी है। गर्म हवाएं, प्रदूषण, धूल के कण और एलर्जन आंखों की सतह को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा लगातार एसी में रहने से भी आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है।
स्क्रीन टाइम बढ़ना भी एक बड़ी वजह है, क्योंकि मोबाइल और लैपटॉप का अधिक उपयोग आंखों की झपकने की दर को कम कर देता है, जिससे थकान और ड्राईनेस बढ़ती है। स्विमिंग पूल में बिना गॉगल्स के तैरना भी आंखों में जलन और संक्रमण का कारण बन सकता है।
कब हो सकती है समस्या गंभीर?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि आंखों में लगातार लालिमा, दर्द, सूजन, धुंधला दिखाई देना या रोशनी के प्रति संवेदनशीलता बनी रहे, तो यह किसी संक्रमण या गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के उपाय
डॉक्टरों के अनुसार पर्याप्त पानी पीना, आई ड्रॉप्स का सही उपयोग (डॉक्टर की सलाह पर) और आंखों को हाइड्रेट रखना जरूरी है। बाहर निकलते समय UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेज पहनना चाहिए और धूल-धूप से बचाव करना चाहिए। स्क्रीन टाइम कम करने के लिए 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह दी जाती है, जिसमें हर 20 मिनट में 20 फीट दूर 20 सेकंड तक देखना शामिल है।
इसके अलावा आंखों की साफ-सफाई, संतुलित आहार और हरी सब्जियों व ओमेगा-3 युक्त भोजन का सेवन भी आंखों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से समस्या बढ़ सकती है, इसलिए समय रहते सावधानी और उपचार जरूरी है।
