सिंहासन खाली करो : शशि थरूर भी CEC के विरोध में शामिल हुए, कहा- यह सरकार जाएगी
punjabkesari.in Monday, Oct 12, 2026 - 03:07 PM (IST)
नई दिल्ली : चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर भी विपक्ष की आलोचना में शामिल हो गए हैं। सोमवार को उन्होंने रामधारी सिंह 'दिनकर' की मशहूर हिंदी कविता 'जनतंत्र का जन्म' की कुछ पंक्तियां शेयर कीं जिनमें यह प्रसिद्ध लाइन भी शामिल है, "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है"। एक अलग पोस्ट में उन्होंने राहुल गांधी की बात को दोहराते हुए कहा, 'यह सरकार जाएगी', जिससे उनके इस विरोध में शामिल होने को एक राजनीतिक रंग मिल गया।
थरूर के ये पोस्ट ऐसे समय में आए हैं जब विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन राष्ट्रीय राजधानी में मार्च निकालने की तैयारी कर रहा है। यह मार्च शनिवार (10 अक्टूबर) को कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान छात्रों और महिलाओं पर कथित पुलिस हिंसा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ताओं के हमलों के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
जहां राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पिछले एक हफ्ते से विरोध-प्रदर्शन कर रही है, वहीं थरूर अब तक इससे दूर ही रहे हैं और उन्हें इस आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेते नहीं देखा गया है। उनके ये ताजा बयान इसलिए भी अहम हैं क्योंकि राजनयिक से राजनेता बने थरूर ने कई मुद्दों पर BJP के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन किया है जिसमें 'ऑपरेशन सिंदूर' (मई 2025 में पाकिस्तान के साथ भारत का चार दिन का सैन्य टकराव) पर सरकार के रुख का समर्थन करना भी शामिल है।
शनिवार को BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा की गई कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए थरूर ने X पर लिखा, 'आज के युवाओं को वही सब सबक सिखाने के लिए धन्यवाद, मोदी जी!'
सरकार के लिए शशि थरूर का संदेश: राजनीतिक महत्व वाली एक कविता
सोमवार को एक पोस्ट में थरूर ने लिखा, 'आज की कविता: जैसा कि रामधारी सिंह 'दिनकर' ने अपनी मशहूर कविता 'जनतंत्र का जन्म' में लिखा था।' दिनकर की कविता जन-शक्ति और इस विचार से जुड़ी है कि सत्ता आखिरकार जनता के हाथ में होती है। विपक्ष और अधिकारियों के बीच बढ़ते टकराव के बीच इस कविता का जिक्र करने से थरूर की पोस्ट को एक अलग राजनीतिक रंग मिल गया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान दिनकर की कविता की इन्हीं पंक्तियों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, थरूर ने साफ तौर पर यह नहीं बताया कि 'सिंहासन' का जिक्र किस व्यक्ति या संस्था के लिए किया गया है। फिर भी, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच आई यह पोस्ट सत्ता के पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ एक व्यापक संदेश के तौर पर देखी जा सकती है। अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ और साहित्यिक संदर्भों के लिए पहचाने जाने वाले थरूर का दिनकर की मशहूर हिंदी कविता को चुनना भी खास रहा; दिनकर को व्यापक रूप से राष्ट्रीय कवि माना जाता है।
शशि थरूर ने दिल्ली पुलिस द्वारा जॉन ब्रिटास के साथ किए गए व्यवहार की निंदा की
थरूर ने CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास के साथ दिल्ली पुलिस के कथित व्यवहार की भी आलोचना की और रविवार को एक पोस्ट में सांसद का समर्थन किया। थरूर ने X पर पोस्ट किया, 'यह चौंकाने वाला है। जॉन ब्रिटास एक सम्मानित सांसद और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति के एक अहम और सक्रिय सदस्य हैं। समिति के अध्यक्ष के तौर पर मैं एक प्रतिष्ठित सदस्य के साथ किए गए दुर्व्यवहार की निंदा करता हूं और दिल्ली पुलिस से इस घटना की जांच करने की मांग करता हूं।'
कांग्रेस सांसद ने रविवार को X पर अपनी पोस्ट में आगे कहा, 'लोकतंत्र में पुलिसिंग के कुछ मानक होते हैं जिनका पालन किया जाना चाहिए!' 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में बड़े पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली पुलिस ने विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्रियों, छात्र नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए गए लोगों में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, पश्चिम बंगाल की पूर्व CM ममता बनर्जी, केरल के पूर्व CM पिनाराई विजयन, त्रिपुरा के पूर्व CM माणिक सरकार, CPI(M) के महासचिव MA बेबी, RJD सांसद मनोज झा और CPI(ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल थे।
CJP नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर हिरासत में लिया गया था और 11 अक्टूबर को कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। हिरासत में लिए गए लोगों में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की नेशनल प्रेसिडेंट नेहा बोरा भी शामिल थीं।
थरूर का पुलिस की आलोचना करना, दिनकर का जिक्र करना और राहुल गांधी की बातों को आगे बढ़ाना, CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के तेज होते अभियान के बीच हुआ है। हालांकि उनकी कविता वाली पोस्ट में उनके राजनीतिक संदेश का निशाना कौन है, इसका साफ तौर पर जिक्र नहीं था, लेकिन जिस समय यह पोस्ट की गई, उससे यह साफ़ हो गया कि यह विपक्ष और अधिकारियों के बीच चल रहे टकराव का ही हिस्सा है।
