लापता होने के बाद मृत मिले युवा IT इंजीनियर... पिता बोले- साइबर ठगों ने की प्रताड़ना
punjabkesari.in Friday, Oct 16, 2026 - 04:13 PM (IST)
पुणे : पुणे में हाल ही में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक्सेंचर कंपनी में काम करने वाले 22 साल के युवा IT प्रोफेशनल शिखर सक्सेना की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिवार को शक है कि उन्हें साइबर ठगों द्वारा भारी मानसिक प्रताड़ना और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी धमकियों का शिकार बनाया गया था।
पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या उस व्यक्ति को किसी झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी गई थी और क्या मौत से कुछ समय पहले उसे पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया था। शिखर सक्सेना, जो लगभग तीन महीने पहले पुणे में IT कंपनी 'एक्सेंचर' (Accenture) से जुड़े थे, 1 अक्टूबर को शहर की एक ऊंची आवासीय इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई।
क्या है पूरा मामला?
उनके पिता, कुमार गौरव सक्सेना ने आरोप लगाया है कि अनजान कॉल करने वालों ने उनके बेटे से बार-बार पैसे मांगे और उसे ड्रग्स से जुड़े एक मामले में फंसाने की धमकी दी। ठगी का यह तरीका 'ड्रग पार्सल स्कैम' जैसा लगता है, जिसमें ठग अपने शिकार को यह यकीन दिलाकर पैसे ऐंठते हैं कि उनके नाम आए पार्सल में कोई अवैध सामान (ड्रग्स) मिला है। जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या शिखर को भी इसी तरह के स्कैम का निशाना बनाया गया था।
पिता की शिकायत पर दर्ज FIR के अनुसार, 30 सितंबर को एक व्यक्ति ने उस IT प्रोफेशनल से संपर्क करने की कोशिश की। शिखर का फोन बंद होने के कारण, कॉल उनकी मां के पास चली गई। जब उनकी मां ने कॉल करने वाले को बताया कि उनका बेटा पुणे में है, तो उसने फोन काट दिया। इसके बाद, आरोपी ने शिखर के पिता से संपर्क किया और खुद को अजय कुमार बताया। उसने खुद को शिखर के एक ऐसे दोस्त के रूप में पेश करने की कोशिश की, जो उसे एक लोकप्रिय ऑनलाइन गेम के जरिए जानता था।
हालांकि, जब कुमार गौरव ने कहा कि उनका बेटा कभी वह गेम नहीं खेलता था, तो कॉल करने वाले ने फोन काट दिया। बाद में उसने फिर से संपर्क करने की कोशिश की, और इस बार खुद को हरियाणा का सब-इंस्पेक्टर बताया। उसने शिखर के पिता से कहा कि उनका बेटा अवैध ड्रग्स बेचने के एक मामले में वांछित (wanted) है। इस बातचीत से घबराकर, कुमार गौरव 30 सितंबर की रात पुणे पहुंच गए। शिखर के चाचा, जो उसी शहर में रहते हैं, ने भी पुलिस से संपर्क किया क्योंकि उनका भतीजा कहीं नहीं मिल रहा था। शुरुआत में 'लापता व्यक्ति' (missing person) का मामला दर्ज किया गया और सोशल मीडिया पर उनके बारे में जानकारी देने की अपील की गई। अगली सुबह उनकी तलाश खत्म हुई। 1 अक्टूबर को सुबह करीब 6:30 बजे, शिखर अपने पेइंग गेस्ट आवास से लगभग एक किलोमीटर दूर, एक 27-मंजिला रिहायशी इमारत के परिसर में मृत पाया गया।
शिखर के लैपटॉप की जांच करने और 29 सितंबर के वित्तीय लेन-देन के स्क्रीनशॉट मिलने के बाद, परिवार को ऑनलाइन जबरन वसूली का शक और गहरा गया। FIR के अनुसार, रिकॉर्ड से पता चला कि "अजय कुमार" (जो शिखर के व्हाट्सएप कॉन्टैक्ट्स में से एक था) से जुड़े लेन-देन के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजे गए थे।
पुलिस शिकायत में दी गई जानकारी से यह पता नहीं चल सका कि ठीक कितनी रकम ट्रांसफर की गई और पैसे पाने वाले कौन थे। जांचकर्ता इन लेन-देन की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पैसे किसे मिले और क्या ये ट्रांसफर कथित धमकियों से जुड़े थे। 13 अक्टूबर को परिवार को एक और संदिग्ध कॉल आया। एक व्यक्ति ने खुद को कूरियर ऑफिस का कर्मचारी बताते हुए शिखर के पिता से संपर्क किया और शिखर के बारे में पूछा। जब कुमार गौरव ने उससे सवाल पूछना शुरू किया, तो फोन करने वाले ने फिर से कॉल काट दिया। अगले दिन, उन्होंने पुणे में पुलिस शिकायत दर्ज कराई, जिसमें दो अज्ञात लोगों पर जबरन वसूली, आपराधिक धमकी और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं - 108, 308(6) और 351(4) - के तहत FIR दर्ज की गई है। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजय चव्हाण ने बताया कि शिखर की मौत के मामले में कई पहलुओं से जांच की जा रही है, जिसमें साइबर फ्रॉड भी शामिल है।
उत्तराखंड के रहने वाले शिखर ने हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) से BTech किया था, जिसके बाद उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के जरिए एक्सेंचर (Accenture) में नौकरी मिल गई। उन्होंने जुलाई में कंपनी में 'एडवांस्ड इंजीनियरिंग एनालिस्ट' के तौर पर काम शुरू किया था और वे मगरपट्टा सिटी स्थित ऑफिस में काम करते थे। उनके पिता, जो उत्तराखंड में एक सरकारी अधिकारी हैं, ने उन्हें एक प्रतिभाशाली और अच्छे व्यवहार वाला युवक बताया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करने वालों की गिरफ्तारी की मांग की।
