1 currency note: 1 रुपये के पुराने नोट के बदले 45 लाख रुपये... साइबर ठगी के एक बड़े गिरोह का खुलासा
punjabkesari.in Tuesday, Oct 13, 2026 - 10:54 AM (IST)
नई दिल्ली: साइबर धोखाधड़ी के एक मामले की जांच के दौरान हैदराबाद साइबर क्राइम पुलिस को एक संदिग्ध 'म्यूल अकाउंट नेटवर्क' का पता चला। इस मामले में हैदराबाद के एक निवासी को पुराने 1 रुपए के नोट के बदले 45 लाख रुपए देने का वादा करके 7.93 लाख रुपए की धोखाधड़ी की गई थी।
यह नेटवर्क पूरे भारत में लगभग 450 मामलों से जुड़ा है, जिनमें 60 करोड़ रुपए से 70 करोड़ रुपए तक के ट्रांज़ैक्शन का अनुमान है। पुलिस के अनुसार, कर्नाटक के बीदर में रहने वाले रमेश आर्थिक तंगी के कारण अपने परिवार के साथ हैदराबाद आ गए थे। उन्होंने किराए की कार चलाकर ड्राइवर के तौर पर काम करना शुरू किया, और इसी दौरान साइबर जालसाजों से उनके संपर्क बने।
जांचकर्ताओं को पता चला कि रमेश ने एक अन्य आरोपी (जो अभी फरार है) के साथ मिलकर रामंथपुर और उसके आसपास के इलाकों में छात्रों, डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य निवासियों से संपर्क किया। उन्होंने उनके बैंक अकाउंट और सिम कार्ड का इस्तेमाल करने के बदले कमीशन देने का लालच दिया। आरोपियों ने कथित तौर पर लगभग 60 से 70 लोगों से बैंक पासबुक, एटीएम और डेबिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी और सिम कार्ड इकट्ठा किए। इसके बाद इन्हें कूरियर के ज़रिए हरियाणा में अपने साथियों को भेजा गया, ताकि साइबर धोखाधड़ी के कामों में इनका इस्तेमाल किया जा सके।
पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के ज़रिए लगभग 60 करोड़ रुपए से 70 करोड़ रुपए के धोखाधड़ी वाले ट्रांज़ैक्शन किए गए और इन अकाउंट्स से देश भर में साइबर अपराध के करीब 450 मामले जुड़े हैं। दूसरे आरोपी अनिल ने कथित तौर पर अलग-अलग बैंकों में तीन सेविंग्स अकाउंट खोले और कमीशन के बदले उनकी जानकारी रमेश को सौंप दी। इस मामले की जांच 25 सितंबर को मिली एक शिकायत के बाद शुरू हुई। शिकायत करने वाले व्यक्ति से जालसाजों ने फेसबुक के ज़रिए संपर्क किया था और पुराने 1 रुपए के नोट के बदले 45 लाख रुपए देने का वादा किया था।
जालसाजों ने उसे 7,93,351 रुपए ट्रांसफर करने के लिए राजी कर लिया, लेकिन अपना वादा पूरा नहीं किया। उनकी शिकायत के आधार पर, साइबर क्राइम पुलिस ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया और पैसों के लेन-देन की जांच शुरू की।
जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि आरोपी 'म्यूल अकाउंट्स' (दूसरे के नाम पर खुले बैंक खाते जिनका इस्तेमाल गैर-कानूनी कामों के लिए होता है) के ज़रिए पैसे के लेन-देन में शामिल थे। एक खास जानकारी के आधार पर, इंस्पेक्टर एम. सुरेंद्र की अगुवाई वाली टीम ने 8 अक्टूबर को दोपहर के समय अंबरपेट के रामंथपुर इलाके से रमेश और अनिल को पकड़ा। उनके पास से दो मोबाइल फोन ज़ब्त किए गए। पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने कथित तौर पर माना कि वे कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को बैंक खाते और सिम कार्ड इकट्ठा करके सप्लाई कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि दोनों को पता था कि इन खातों और सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी के लिए किया जाएगा, फिर भी वे पैसे कमाने के लिए इनकी सप्लाई करते रहे। संदिग्ध फाइनेंशियल नेटवर्क और फरार आरोपी की भूमिका को लेकर जांच जारी है।
