Sharma ji chaat: 2 रुपये में रेहड़ी से शुरू किया दही भल्ले का बिजनेस, आज करोड़ों की BMW से आते हैं ''करोड़पति चाटवाले''

punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 11:46 AM (IST)

नेशनल डेस्क: भारतीय स्ट्रीट फूड की बात करें तो दुनियाभर में इसके दीवाने हैं। चाहे स्थानीय हों, देशी सैलानी या विदेशी, कोई भी इसका स्वाद चखने से खुद को रोक नहीं सकता। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन चाटवालों की कमाई कितनी हो सकती है? दिल्ली के नेहरू प्लेस का एक चाट वाला इस सवाल का सबसे बड़ा जवाब है।

मुकुंद कुमार शर्मा, जिन्हें लोग प्यार से ‘करोड़पति भल्ले वाले’ कहते हैं, हर सुबह अपनी BMW पर बैठकर नेहरू प्लेस आते हैं और अपने प्रसिद्ध ‘शर्मा जी चाट’ स्टॉल पर दही भल्ला बेचते हैं। 1989 से उन्होंने यह काम शुरू किया था और आज उनकी मेहनत उन्हें न सिर्फ नाम बल्कि दौलत भी दे चुकी है।

सादा स्टॉल, बड़ी पहचान
नेहरू प्लेस, जो दिल्ली के सबसे बड़े कंप्यूटर मार्केट्स में से एक है और कॉर्पोरेट ऑफिसेस से घिरा हुआ है, वहां मुकुंद अपने छोटे फोल्डेबल टेबल पर दही भल्ला परोसते हैं। उनकी यात्रा बहुत मामूली शुरुआत से शुरू हुई – एक प्लेट चाट सिर्फ 2 रुपये में बिकती थी। आज वही प्लेट 50 रुपये में बिकती है।

तीन पीढ़ियों का कारोबार
शर्मा परिवार का दही भल्ला कारोबार दिल्ली में तीन पीढ़ियों तक पहुँच चुका है। यह कहानी कोलकाता से शुरू हुई थी, जहां मुकुंद के परिवार ने पहले अपना चाट वाला शॉप चलाया था और बाद में दिल्ली शिफ्ट हो गए।

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स्वाद, क्वालिटी और खास मसाला
मुकुंद ने समय के साथ अपनी रेसिपी पर काम किया और दिल्ली में अपने ग्राहकों की एक बड़ी फैन फॉलोइंग बनाई। लोग शहर के अलग-अलग हिस्सों से और यहां तक कि बाहर से भी उनके स्वाद का आनंद लेने आते हैं। शर्मा जी चाट की खासियत है – उसका अनोखा तरीका, ताजगी से भरे घटक और स्वच्छता।

खास सामग्री और भरोसेमंद चटनी
मुकुंद 16 तरह के मसाले, मूंग दाल के भल्ले और रोजाना लगभग 40 किलो ताजा दही इस्तेमाल करते हैं। उनके घर पर बनी डेट-बेस्ड चटनी इतनी भरोसेमंद है कि उन्होंने इसके लिए छह महीने की गारंटी तक रखी है।

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दिनभर भीड़ और लगातार बिक्री
स्टॉल सुबह 9–10 बजे खुलता है और शाम 7 बजे तक चलता है। दिनभर लोग यहां आते रहते हैं। अगर आप कभी नेहरू प्लेस जाएं, तो मसालों की खुशबू आपको सीधे शर्मा जी चाट तक ले जाएगी।

सफलता के बावजूद जड़ें नहीं छोड़ीं
सबसे खास बात यह है कि मुकुंद शर्मा अपनी सफलता के बावजूद जमीन से जुड़े हुए हैं। BMW जैसी लग्जरी कार होने के बावजूद वे अपने छोटे फोल्डेबल टेबल से ही चाट बेचते हैं।

शब्दों से नहीं, काम से बनाई पहचान
हालांकि उनकी कमाई के सटीक आंकड़े सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन मुकुंद को एक सेल्फ-मेड मिलियनेयर स्ट्रीट वेंडर माना जाता है। उन्होंने बड़ी इन्वेस्टमेंट, फॉर्मल बिजनेस एजुकेशन या डिजिटल मार्केटिंग के बिना ही अपने कारोबार को सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी सफलता का राज है – भरोसा, लगातार मेहनत और गुणवत्ता।

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स्ट्रीट फूड में छुपा बड़ा बिजनेस
मुकुंद शर्मा की कहानी यह साबित करती है कि स्ट्रीट फूड व्यवसाय न केवल सम्मानजनक हो सकता है बल्कि बेहद लाभदायक भी। और असली सफलता वहीं है, जहां आप अपने काम में महारत हासिल करें।


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Content Editor

Anu Malhotra

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