HRA rules: सरकार बदलने जा रही HRA नियम, इन-हैंड सैलरी में होगा बड़ा इजाफा! जानें क्या होगा नया स्ट्रक्चर?
punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 11:27 AM (IST)
नेशनल डेस्क: शहरों में बढ़ते घर के किराए और महंगाई की मार झेल रहे नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक शानदार खबर आ रही है। सरकार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) से जुड़े दशकों पुराने नियमों को बदलने की तैयारी में है। इस कदम का सीधा फायदा उन लाखों कर्मचारियों को होगा, जो बेंगलुरु, पुणे और हैदराबाद जैसे बड़े शहरों में रहकर काम कर रहे हैं। इस बदलाव के बाद न केवल आपके हाथ में आने वाली तनख्वाह बढ़ेगी, बल्कि टैक्स का बोझ भी काफी कम हो जाएगा।
दिल्ली-मुंबई की तर्ज पर अब इन शहरों में भी मिलेगी 50% छूट
मौजूदा टैक्स व्यवस्था में एक बड़ी विसंगति रही है। अब तक केवल चार महानगरों—दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई—में रहने वाले कर्मचारियों को ही उनकी बेसिक सैलरी के 50 प्रतिशत तक HRA पर टैक्स छूट का लाभ मिलता है। बाकी सभी शहरों के लिए यह सीमा महज 40 प्रतिशत ही थी। अब सरकार के नए प्रस्ताव में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी इस '50 प्रतिशत क्लब' में शामिल करने की योजना है। यानी अब इन उभरते हुए महानगरों में रहने वाले लोगों को भी बड़े शहरों जैसी टैक्स राहत मिल सकेगी।
क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
पिछले कुछ सालों में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहर देश के बड़े आईटी और सर्विस हब बनकर उभरे हैं। यहां रहने का खर्च और मकानों का किराया अब दिल्ली या मुंबई से कम नहीं रह गया है। सरकार का मानना है कि पुराने नियमों की वजह से इन शहरों के कर्मचारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। अब शहरी हकीकत को देखते हुए नियमों का दायरा बढ़ाना जरूरी हो गया है ताकि कर्मचारियों की बचत को बढ़ाया जा सके।
पुरानी टैक्स व्यवस्था वालों की होगी 'बल्ले-बल्ले'
इस राहत का सीधा लाभ उन लोगों को मिलेगा जो अभी भी 'ओल्ड टैक्स रिजीम' (Old Tax Regime) का पालन कर रहे हैं। चूंकि नए टैक्स सिस्टम में HRA जैसी छूट का प्रावधान नहीं है, इसलिए पुरानी व्यवस्था चुनने वाले कर्मचारियों के लिए यह किसी लॉटरी से कम नहीं है। टैक्सेबल इनकम घटने से हर महीने जेब में आने वाली रकम में इजाफा होगा।
क्या होगा नया स्ट्रक्चर?
अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो देश के कुल 8 बड़े शहर 50% HRA छूट की कैटेगरी में आ जाएंगे। इनमें चार पुराने महानगर और चार नए उभरते हुए टेक हब शामिल होंगे। बाकी देश के अन्य सभी शहरों के लिए 40% की पुरानी सीमा ही लागू रहेगी। यह फैसला उन मिडिल क्लास परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा जो बढ़ते शहरी खर्चों के बीच अपनी सेविंग्स बढ़ाने के लिए जूझ रहे हैं।
