मोहन भागवत के लंदन दौरे पर बवालः सिख फेडरेशन का गुस्सा भड़का, गुरुद्वारा प्रबंधन ने दिया करारा जवाब
punjabkesari.in Tuesday, Sep 08, 2026 - 12:17 PM (IST)
London: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत की ब्रिटेन यात्रा के दौरान लंदन में विरोध प्रदर्शन हुआ है। भागवत के Khalsa Jatha British Isles Gurdwara दौरे को लेकर सिख समुदाय के कुछ संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई, जबकि गुरुद्वारा प्रबंधन ने इसे धार्मिक मुलाकात बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति को गुरुद्वारे में आने की अनुमति देना उसके संगठन या विचारधारा का समर्थन करना नहीं है। रविवार को लंदन के पार्लियामेंट स्क्वायर में प्रदर्शन किया गया। इसका आयोजन South Asian Solidarity Group ने किया था, जिसे Indian Workers Association (Great Britain) और कुछ अन्य प्रवासी एवं नागरिक संगठनों का समर्थन मिला।
सिख फेडरेशन ने जताई कड़ी नाराजगी
सिख फेडरेशन (UK) ने भागवत के गुरुद्वारा दौरे पर सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि RSS प्रमुख की यात्रा बिना सार्वजनिक घोषणा के हुई और यह एक छोटे निजी कार्यक्रम के रूप में आयोजित की गई, जिसमें आम संगत मौजूद नहीं थी। फेडरेशन ने RSS को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक संगठन मानने से इनकार करते हुए उसकी विचारधारा को लेकर गंभीर आपत्तियां जताईं। संगठन के मुताबिक, गुरुद्वारे ऐसे स्थान होने चाहिए जहां समुदाय को सम्मान और सुरक्षा मिले, न कि ऐसे मंच जहां विवादित राजनीतिक विचारधाराओं को वैधता मिले।
गुरुद्वारा प्रबंधन ने दिया करारा जवाब
वहीं, खालसा जथा ब्रिटिश आइल्स के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह आनंद ने इस पूरे मामले को अलग नजरिए से देखा। उन्होंने कहा कि भागवत गुरुद्वारे में ‘दर्शन’ के लिए आए थे और गुरुद्वारा सभी लोगों के लिए खुला है, बशर्ते सिख मर्यादा का पालन किया जाए। उन्होंने साफ किया कि भागवत ने संगत को संबोधित नहीं किया, कोई राजनीतिक बैठक नहीं की और उनकी यात्रा को गुरुद्वारे की ओर से RSS या उसकी राजनीति के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। आनंद ने यह भी माना कि सिख समुदाय में RSS और भागवत को लेकर राय एक जैसी नहीं है। कुछ लोग बातचीत को बेहतर रास्ता मानते हैं, जबकि कई लोग RSS की विचारधारा और सिख पहचान को लेकर गहरी आशंका रखते हैं।
सिख पहचान और हिंदुत्व पर भी बहस
विवाद का एक बड़ा मुद्दा हिंदुत्व और सिख पहचान से जुड़ा है। कुछ सिख संगठनों को आशंका है कि सिख पहचान को व्यापक हिंदू पहचान का हिस्सा बताने की कोशिश उनकी अलग धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा 1984 से जुड़े न्याय के मुद्दे, धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार और सिख कार्यकर्ताओं तथा असहमति रखने वालों से जुड़े मुद्दे भी इस बहस के केंद्र में हैं। हालांकि गुरुद्वारा प्रबंधन का कहना है कि मेहमाननवाजी का मतलब अपने सिद्धांतों से समझौता करना नहीं है और संवाद का मतलब अपनी पहचान छोड़ देना भी नहीं है।
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन का भी विरोध
इंडियन वर्कर्स एसोसिएशन ने भी भागवत के दौरे के खिलाफ प्रदर्शन का समर्थन किया। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध हिंदुओं या हिंदू धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि RSS की विचारधारा और ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा को लेकर है। संगठन का कहना है कि भारत में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और अन्य धर्मों के लोग समान रूप से देश के नागरिक हैं और किसी नागरिक को अपनी भारतीय पहचान साबित करने के लिए किसी धार्मिक राष्ट्रीय पहचान को स्वीकार करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
RSS ने बताया संवाद का हिस्सा
वहीं RSS की ओर से भागवत की विदेश यात्रा को विभिन्न समुदायों के साथ संवाद और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की कवायद बताया गया है। संगठन के अनुसार, RSS की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भागवत की विदेश यात्रा का उद्देश्य ‘एकता में विविधता’, सामाजिक सद्भाव और संवाद को बढ़ावा देना है। इस तरह भागवत के लंदन दौरे ने ब्रिटिश सिख समुदाय में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। एक पक्ष इसे संवाद और गुरुद्वारे के खुले दरवाजे की परंपरा के तौर पर देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे RSS को स्वीकार्यता देने के तौर पर आलोचना कर रहा है।
