चीनी न्यूक्लियर मिसाइलों में रॉकेट फ्यूल की जगह भरा पानी! PLA टॉप जनरल पर विदेशी एजेंसियों को डेटा लीक का आरोप
punjabkesari.in Wednesday, Feb 04, 2026 - 05:37 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। अमेरिकी खुफिया विभाग के दावों के अनुसार, चीन के परमाणु मिसाइल बेड़े में शामिल कुछ मिसाइलों में रॉकेट फ्यूल के स्थान पर साधारण पानी भरा हुआ पाया गया। इस तकनीकी धोखेबाजी की वजह से ये घातक मिसाइलें हमले के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थीं। जब यह मामला राष्ट्रपति शी जिनपिंग के संज्ञान में आया, तो उन्होंने सेना में भारी फेरबदल करते हुए रॉकेट फोर्स के आला अधिकारियों को पद से हटा दिया है।
राष्ट्रपति के करीबी जनरल झांग यूक्सिया पर गिरी गाज
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा नाम जनरल झांग यूक्सिया का सामने आया है, जिन्हें शी जिनपिंग का बेहद भरोसेमंद माना जाता था। ताजा जानकारी के मुताबिक, उन्हें हिरासत में ले लिया गया है। झांग पर न केवल भ्रष्टाचार के आरोप हैं, बल्कि उन पर जासूसी करने और सेना की गोपनीय जानकारी विदेशी ताकतों को देने का भी संदेह जताया गया है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के वरिष्ठ अधिकारी होने के नाते उन पर सेना की युद्धक क्षमता को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगा है।

रॉकेट फोर्स के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर सफाई
चीन की रॉकेट फोर्स, जो देश के पूरे परमाणु कार्यक्रम की देखरेख करती है, पिछले कुछ समय से लगातार जांच के घेरे में है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि मिसाइल साइलो (लॉन्च सेंटर) में तैनात कई हथियार इस्तेमाल के लायक नहीं थे क्योंकि भ्रष्टाचार की वजह से उनके इग्नीशन सिस्टम में गड़बड़ी थी। यही कारण है कि पिछले दो सालों के भीतर इस फोर्स की पूरी कमांड को बदल दिया गया है ताकि सैन्य बजट में हो रही धांधली को रोका जा सके।
क्या वाकई साजिश के तहत भरा गया पानी?
मिसाइलों में पानी भरे जाने के दावे ने विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि चीन अपनी तरल-ईंधन वाली मिसाइलों में आमतौर पर पहले से फ्यूल भरकर नहीं रखता। ऐसे में अगर वहां पानी पाया गया है, तो यह स्पष्ट तौर पर एक बड़ी साजिश या भ्रष्टाचार का परिणाम हो सकता है, जहां ईंधन के पैसे बचाकर सिस्टम को बेकार कर दिया गया। चीनी सेना के मुखपत्रों ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि भ्रष्टाचार सेना की लड़ने की ताकत को खत्म कर देता है।
ताइवान संकट और सैन्य तैयारियों की चुनौतियां
यह खुलासा ऐसे वक्त में हुआ है जब चीन और ताइवान के बीच तनाव चरम पर है और चीनी सेना लगातार युद्धाभ्यास कर रही है। पश्चिमी देशों की एजेंसियां मानती हैं कि चीन भविष्य में ताइवान को लेकर कोई बड़ा कदम उठा सकता है। ऐसी स्थिति में शी जिनपिंग अपनी सेना के भीतर किसी भी तरह की लापरवाही या गद्दारी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं, इसीलिए वे उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई कर रहे हैं।
