खुफिया अमेरिकी रिपोर्ट में दावा:चीन की परमाणु मिसाइलों में फ्यूल की जगह भरा पानी, जिनपिंग ने इसी लिए...
punjabkesari.in Monday, Feb 02, 2026 - 07:46 PM (IST)
Washington: चीनी सेना की रणनीतिक क्षमताओं को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन की कुछ परमाणु मिसाइलों में ईंधन (फ्यूल) की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे लॉन्च की स्थिति में होने के बावजूद उड़ान भरने में असमर्थ होतीं। यह मिसाइलें पश्चिमी चीन के शिनजियांग प्रांत में स्थित चीनी रॉकेट फोर्स के एक गोपनीय सैन्य ठिकाने पर तैनात थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी गंभीर खुलासे के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी सेना में भ्रष्टाचार और अक्षमता के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए चीनी रॉकेट फोर्स के प्रमुख जनरल झांग यूक्सिया को पद से हटा दिया। यह कदम चीन की परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की विश्वसनीयता पर उठे सवालों के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
कौन थे जनरल झांग यूक्सिया
जनरल झांग यूक्सिया को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का करीबी और चीन के सबसे प्रभावशाली सैन्य अधिकारियों में गिना जाता था। वे चीन के केंद्रीय सैन्य आयोग (Central Military Commission) में शी जिनपिंग के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ सदस्य थे। यह आयोग चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA), पीपुल्स आर्म्ड पुलिस और मिलिशिया का सर्वोच्च नेतृत्व करता है। चीन की सैन्य रणनीति और हथियार विकास से जुड़े सभी बड़े फैसले इसी मंच से लिए जाते हैं।
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में क्या आरोप
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनरल झांग यूक्सिया को 19 जनवरी को हिरासत में लिया गया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने चीन के परमाणु हथियारों से जुड़ा संवेदनशील डेटा अमेरिका को लीक किया, पदोन्नति के बदले रिश्वत ली और पीएलए की युद्ध तैयारी से समझौता किया। चीन की सेना के आधिकारिक मुखपत्र PLA डेली में प्रकाशित एक लेख का हवाला देते हुए साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने लिखा कि भ्रष्टाचार ने चीन की सैन्य युद्ध क्षमता को कमजोर किया है और ऐसे “बड़े दोषियों” पर सख्त कार्रवाई जरूरी है जो सैन्य बजट और हथियार प्रणालियों में हेरफेर करते हैं।
शिनजियांग मिसाइल ठिकाने और पानी वाला दावा
ब्लूमबर्ग की 2024 की एक रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया था कि शिनजियांग क्षेत्र में स्थित मिसाइल साइलो पर ऐसे ढक्कन लगाए गए थे, जो मिसाइल लॉन्च को प्रभावी ढंग से रोक सकते थे। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि कुछ मिसाइलों में फ्यूल की जगह पानी भरा हुआ था, जिससे वे केवल दिखावटी रूप से तैनात प्रतीत होती थीं।
अलग-अलग रिपोर्ट्स, लग राय
हालांकि, इन दावों को लेकर सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) ने कहा है कि भले ही कुछ मिसाइलों में अस्थायी रूप से पानी भरा गया हो, लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं मानी जा सकती। रिपोर्ट के अनुसार, शी जिनपिंग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान इस बात का संकेत है कि वह चीन की परमाणु ताकत को वास्तविक रूप से मजबूत करने के प्रति गंभीर हैं। वहीं, एशिया टाइम्स ने ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीन आमतौर पर अपने लिक्विड-फ्यूल मिसाइलों में पहले से प्रोपेलेंट भरकर नहीं रखता। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मिसाइलों में पानी भरने का कोई तार्किक कारण नहीं है, जब तक कि यह जानबूझकर किया गया कृत्य न हो।
शी जिनपिंग का सैन्य सफाई अभियान
विश्लेषकों के अनुसार, हाल के वर्षों में चीनी सेना के कई वरिष्ठ अधिकारियों की बर्खास्तगी इस बात का संकेत है कि शी जिनपिंग सैन्य ढांचे में फैले भ्रष्टाचार को खत्म करने और पीएलए की युद्ध क्षमता को वास्तविक रूप से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। रॉकेट फोर्स में हुई कार्रवाई को चीन की परमाणु रणनीति के लिहाज से अब तक का सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। फिलहाल, चीन की सरकार ने इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन वैश्विक स्तर पर इस मुद्दे ने चीन की सैन्य पारदर्शिता और परमाणु तैयारियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
