महज 75 दिनों में रेप-हत्या के आरोपी को फांसी, तमिलनाडु कोर्ट ने CCTV और DNA सबूतों पर सुनाया फैसला
punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 03:07 PM (IST)
नेशनल डेस्क: तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले की जिला कोर्ट ने रेप- हत्या के मामले में ऐतिहासकि फैसला सुनाया है। महज 75 दिन की सुनवाई में आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने फैसला सुनाते समय फोरेंसिक रिपोर्ट, डीएनए जांच और CCTV फुटेज को अहम सबूत माना। आरोपी ने 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म और हत्या के बाद फिर उसकी हत्या की घटना को अंजाम दिया था।
CCTV कैमरे ने खोले राज
आप को बता दें कि घटना एक दूरदराज गांव की है, जहां नाबालिग लड़की शौच के लिए घर से बाहर निकली थी। आरोप है कि आरोपी ने रास्ते में उसे रोककर पहले दुष्कर्म किया और फिर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई थी। शुरुआती जांच में पुलिस को कोई ठोस सुराग नहीं मिल रहा था। इसके बाद जांच टीम ने गांव और शहर के बीच लगे CCTV कैमरों की करीब 1000 घंटे की फुटेज खंगाली। इसी दौरान एक विंडमिल परिसर में लगे कैमरे में आरोपी की संदिग्ध गतिविधियां रिकॉर्ड मिलीं। फुटेज में वह घटना से कुछ घंटे पहले गांव में प्रवेश करता और अगली सुबह बाहर निकलता दिखाई दिया।
महज 21 दिनों में पुलिस ने दाखिल की चार्जशीट
पुलिस ने आरोपी की पहचान उसके कपड़ों और मूवमेंट के आधार पर की। जांच में आरोपी की शर्ट पर मिले खून के नमूने पीड़िता से मैच हुए, जबकि डीएनए जांच में भी आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले। तेज कार्रवाई करते हुए पुलिस ने महज 21 दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी। अदालत ने सुनवाई पूरी होने के 75 दिनों के भीतर फैसला सुनाते हुए आरोपी को दोहरी मौत की सजा सुनाई। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले से इलाके की रेकी कर रहा था और वारदात की योजना बनाकर आया था।
सीएम ने कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
पिछले मार्च में थूथुकुडी ज़िले के विलाथिकुलम में 12वीं क्लास की एक स्टूडेंट का सेक्शुअल असॉल्ट किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। थूथुकुडी ज़िले के POCSO कोर्ट ने आज आरोपी धर्मा मुनीश्वरन को दोहरी मौत की सज़ा सुनाई। इस केस में 71 गवाहों से पूछताछ की गई और स्पीडी ट्रायल चलाया गया, और धर्मा मुनीश्वरन नाम के आरोपी को सेक्शुअल असॉल्ट और हत्या के जुर्म में दोहरी मौत की सज़ा दी गई है। इस घिनौनी घटना के तीन महीने के अंदर बहुत जल्दी इंसाफ़ हुआ है, और यह फ़ैसला, जो महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पक्का करने की सरकार की कोशिशों में एक अच्छी बात है, स्वागत योग्य है।
