ढाई साल से डायलिसिस, रक्षाबंधन पर बहन ने किडनी देकर बचाई भाई की जान

punjabkesari.in Thursday, Aug 27, 2026 - 10:04 AM (IST)

नई दिल्ली: दिल्ली से सटे नोएडा में रक्षाबंधन के त्योहार से ठीक पहले एक बहन ने अपने छोटे भाई को जिंदगी का सबसे अनमोल तोहफा दिया है। पिछले ढाई सालों से किडनी की गंभीर बीमारी  से जूझ रहा 40 वर्षीय जितेंद्र सिंह गंगवार हफ्ते में तीन बार डायलिसिस करवा रहा था, भाई के इस दर्द के देखते हुए उनकी 45 वर्षीय बड़ी बहन बीना कुमारी गंगवार ने अपनी दाहिनी किडनी दान कर नई जिंदगी दी है।   

ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम ने सफलतापूर्वक ABO-कम्पैटिबल किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी को अंजाम दिया। सर्जरी के बाद डोनर बहन और रिसीवर भाई दोनों की सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है।

 'मेरी बहन ने मुझे नई ज़िंदगी दी'
किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वाले जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि डायलिसिस ने उनकी ज़िंदगी पर बुरा असर डाला था, लेकिन उनकी बहन ने उनका साथ दिया। जब वे इलाज के लिए बाहर जाते थे, तो उनकी बहन उनके बच्चों का भी ध्यान रखती थीं। मेरी बहन पूरी ज़िंदगी मेरे लिए हिम्मत का सहारा रही हैं। आज, वे अपनी किडनी दान करके मुझे नई ज़िंदगी दे रही हैं। मेरे पास यह कहने के लिए शब्द नहीं हैं कि उन्होंने मेरी जान बचाई है। 

जितेंद्र का एक 5 साल का बेटा और एक छोटी बेटी है। वे कहते हैं कि बीना के साथ उनका रिश्ता पहले से ही बहुत गहरा था, लेकिन ट्रांसप्लांट ने उन्हें और भी करीब ला दिया है। हम पहले से ही बहुत करीब थे, लेकिन इसने हमें और करीब ला दिया। जब मैं डायलिसिस के लिए बाहर जाता था, तो मेरी बहन मेरे बच्चों का ध्यान रखती थीं। अब उन्होंने मुझे नई ज़िंदगी दी है। मुझे अपनी बहन के लिए सब कुछ करना है। 
 
अविवाहित बीना कुमारी अपने भाई के परिवार के साथ ही रहती हैं। उन्होंने बताया कि जब भी वे अपने भाई को डायलिसिस के असहनीय दर्द से गुजरते देखती थीं, तो उनका दिल बैठ जाता था। बीना के अनुसार, भाई को किडनी देना उनके लिए कोई बहुत बड़ा त्याग या एहसान नहीं, बल्कि एक बहन का स्वाभाविक प्यार और फर्ज है। बीना ने भावुक होकर कहा, मेरा रोने का मन कर रहा था। मेरे भाई को नई ज़िंदगी मिली, और मेरे लिए यही काफ़ी है। मैं खुश हूं कि अब मेरे भाई को नई ज़िंदगी मिली है। 

जितेंद्र दो साल से ज़्यादा समय से CKD (क्रोनिक किडनी डिज़ीज़) से जूझ रहे थे और उन्हें हफ़्ते में तीन बार डायलिसिस की ज़रूरत पड़ती थी।  इलाज के दौरान परिवार को पैसों की तंगी का सामना भी करना पड़ा, लेकिन सही समय पर मिली मदद और डॉक्टर सहयोग से प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो गई।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Anu Malhotra

Related News