खड़गे का मोदी सरकार पर बड़ा हमला, बोले- 12 साल में शिक्षा व्यवस्था को पंगु और बर्बाद कर दिया

punjabkesari.in Saturday, Sep 05, 2026 - 11:15 PM (IST)

नई दिल्लीः कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को केंद्र सरकार पर पिछले 12 वर्षों में देश की स्कूली और उच्च शिक्षा व्यवस्था को "पंगु और बर्बाद" करने का गंभीर आरोप लगाया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा की गई एक पोस्ट में खड़गे ने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देश की पूरी युवा पीढ़ी का भविष्य बेरहमी से तबाह और कुर्बान कर दिया गया है।

94,000 सरकारी स्कूल बंद, बुनियादी ढांचे की हालत खराब
खड़गे द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में सरकार के बुनियादी ढांचे से जुड़े दावों पर तीखे सवाल उठाए गए हैं। वीडियो के अनुसार, भाजपा के शासनकाल में देश भर में 94,000 सरकारी स्कूल बंद कर दिए गए हैं, जिसका औसत लगभग 25 स्कूल प्रतिदिन आता है। इसके अतिरिक्त, 1.19 लाख स्कूल बिना बिजली के चल रहे हैं और 50% माध्यमिक स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं (लैब) तक नहीं हैं। वीडियो में यह भी सनसनीखेज आरोप लगाया गया है कि देश में 7,993 स्कूल ऐसे हैं जहाँ एक भी छात्र नहीं है, फिर भी वे सरकारी फंड ले रहे हैं।

गरीबों की बेबसी और पढ़ाई बीच में छोड़ने को मजबूर बच्चे
इस रिपोर्ट में महाराष्ट्र की एक 47 वर्षीय विधवा माँ की कहानी को रेखांकित किया गया है, जिसने अपनी बेटी की शिक्षा का खर्च उठाने के लिए नंगे पैर मैराथन दौड़कर 3,000 रुपये का इनाम जीता। इसे मौजूदा सरकारी नीतियों के तहत जनता की बेबसी का एक बड़ा प्रतीक बताया गया है। इसके साथ ही, देश में केवल 5.4% स्कूल ही ऐसे हैं जो कक्षा 1 से 12वीं तक की निरंतर शिक्षा प्रदान करते हैं, जबकि 10 में से 4 बच्चे उच्च माध्यमिक स्तर तक पहुँचने से पहले ही स्कूल छोड़ (ड्रॉप आउट) देते हैं।

आईआईटी और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी, पेपर लीक का मुद्दा
उच्च शिक्षा की बदहाली का जिक्र करते हुए वीडियो में बताया गया कि देश के प्रतिष्ठित आईआईटी (IIT) में 39% और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों के 56% पद खाली पड़े हैं। इसके अलावा, वर्ष 2014 से अब तक देश में 52 प्रमुख परीक्षाओं के पेपर लीक होने का आरोप लगाया गया है, जिसमें 'NEET 2024' पेपर लीक को सबसे बड़ा झटका बताया गया है।

बजट आवंटन में कटौती और छात्र आत्महत्याओं में 80% की वृद्धि
शिक्षा संकट के मानवीय पहलू को उजागर करते हुए दावा किया गया है कि पिछले एक दशक में छात्रों की आत्महत्या के मामलों में 80% की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे लगभग 1.23 लाख मौतें हुई हैं। बजट पर निशाना साधते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने के वादे के विपरीत, वास्तविक आवंटन केवल 4.1% ही है।


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Pardeep

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