बिहार कांग्रेस में संकट! राहुल गांधी खुद संभालेंगे मोर्चा, 6 विधायक दिल्ली तलब
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 10:56 PM (IST)
नेशनल डेस्क: बिहार में कांग्रेस पार्टी इस समय संगठनात्मक कमजोरी और चुनावी झटकों से जूझती नजर आ रही है। लगातार खराब प्रदर्शन और अंदरूनी अनुशासन पर उठते सवालों के बीच अब पार्टी नेतृत्व ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार इकाई को दोबारा पटरी पर लाने के लिए सीधे हस्तक्षेप कर रहे हैं। इसे पार्टी के भीतर एक बड़े डैमेज कंट्रोल मिशन के तौर पर देखा जा रहा है।
23 जनवरी को दिल्ली में अहम बैठक
पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार कांग्रेस के सभी छह मौजूदा विधायकों को 23 जनवरी 2026 को दिल्ली बुलाया गया है। यह बैठक कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित होगी। बैठक में राहुल गांधी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी मौजूद रहेंगे। बिहार कांग्रेस के भविष्य के लिहाज से इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।
क्यों जरूरी हो गया राहुल गांधी का दखल?
राहुल गांधी को बिहार से पार्टी के लिए बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी। कुछ समय पहले कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में हलचल और मजबूती के संकेत भी मिले थे, जिसके बाद पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने तक की बात कही थी। लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए निराशाजनक साबित हुए।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब खबरें सामने आईं कि कांग्रेस के सभी छह विधायक जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो बिहार विधानसभा में कांग्रेस का नामोनिशान तक नहीं बचेगा, जिससे पार्टी को सदन के बजाय केवल सड़क की राजनीति तक सीमित होना पड़ सकता है।
बैठक का एजेंडा: अनुशासन से लेकर रणनीति तक
दिल्ली में होने वाली इस बैठक में राहुल गांधी खुद पार्टी की दिशा और दशा पर चर्चा करेंगे। संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ विधायकों की भूमिका और जिम्मेदारी तय करना भी प्रमुख मुद्दा रहेगा।
बैठक में जिन बिंदुओं पर खास फोकस रहेगा, उनमें शामिल हैं:
- पार्टी के सभी छह विधायकों को एकजुट रखना और कांग्रेस के प्रति उनकी निष्ठा सुनिश्चित करना
- राज्यसभा और एमएलसी चुनावों में पार्टी लाइन से कोई भटकाव न हो, इस पर सहमति
- मनरेगा के नाम में बदलाव के प्रस्ताव को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ आक्रामक रणनीति
- महागठबंधन के सहयोगी दलों के साथ समन्वय बढ़ाकर सरकार को सदन और सड़क दोनों जगह घेरने की योजना
बिहार में संगठन बचाने की आखिरी कोशिश?
पार्टी के भीतर इस कवायद को बिहार कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने की अंतिम बड़ी कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। नेतृत्व चाहता है कि कांग्रेस बिहार में केवल औपचारिक विपक्ष न रहकर एक प्रभावी राजनीतिक ताकत के रूप में उभरे और जनहित के मुद्दों पर मजबूती से आवाज उठाए।
