''सड़कें नहीं, पार्किंग लॉट बन गए हैं महानगर'', संसद में ट्रैफिक का मुद्दा उठाते हुए बोले राघव चड्ढा

punjabkesari.in Friday, Mar 27, 2026 - 03:53 PM (IST)

नेशनल डेस्क: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा अक्सर संसद में आम आदमी से जुड़े मुद्दे उठाते हैं। इस बार उन्होंने देश के प्रमुख महानगरों में हर दिन लगने वाले घंटों के ट्रैफिक जाम ने अब संसद का ध्यान अपनी ओर खींचा है। उन्होंने भारत के बड़े शहरों की बुरी ट्रैफिक व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से एक विशेष 'नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन' शुरू करने की मांग रखी है।

संसद में पेश किया महानगरों का हाल

राघव चड्ढा ने सदन में इससे संबंधित आंकड़े भी पेश किए हैं। आंकड़े पेश करते हुए राघन ने कहा कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और पुणे जैसे शहरों में एक औसत यात्री साल के 100 से 168 घंटे सिर्फ ट्रैफिक में फंसकर बिता देता है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "आश्रम, धौला कुआं या दिल्ली-गुड़गांव हाईवे पर सफर करते समय ऐसा महसूस होता है कि हम सड़क पर नहीं, बल्कि किसी विशाल 'पार्किंग लॉट' में खड़े हैं।"

आंकड़ों की जुबानी बताई कहानी

सांसद ने विभिन्न शहरों में ट्रैफिक के कारण बर्बाद होने वाले सालाना समय का ब्यौरा दिया, जो इस प्रकार है

  • बेंगलुरु: 168 घंटे प्रति वर्ष
  • पुणे: 152 घंटे प्रति वर्ष
  • मुंबई: 126 घंटे प्रति वर्ष
  • कोलकाता: 110 घंटे प्रति वर्ष
  • दिल्ली: 104 घंटे प्रति वर्ष

अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य पर सीधा प्रहार

चड्ढा ने जोर देते हुए कहा कि ट्रैफिक में फंसने से एक समय की बर्बादी होती है और दूसरा इससे देश में होने वाली प्रोडक्टिविटी पर भी असर होता है। लोग अपनी कारों में बैठकर ऑफिस की ज़ूम मीटिंग्स अटेंड करने को मजबूर हैं। इसके अलावा, ईंधन की बर्बादी, बढ़ता वायु प्रदूषण और लोगों की Quality of Life में लगातार आ रही गिरावट समाज के लिए एक बड़ा खतरा है।

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समाधान की मांग रखी  

बढ़ते वाहनों के दबाव (पिछले साल करीब 2.5 करोड़ नए पंजीकरण) को देखते हुए उन्होंने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। उनके सुझावों में शामिल हैं:

1.      नेशनल अर्बन डी-कंजेशन मिशन का गठन।

2.      बेहतर और सुलभ पब्लिक ट्रांसपोर्ट व्यवस्था।

3.      स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम का कार्यान्वयन।

4.      वैज्ञानिक आधार पर तैयार की गई पार्किंग पॉलिसी।

 


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News Editor

Radhika

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