चीन-पाक की जुगलबंदी पर भारत की ''खरी-खरी'': ''जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हमारा अभिन्न हिस्सा, किसी तीसरे देश को बोलने का हक नहीं''

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 09:08 PM (IST)

नई दिल्ली/बीजिंग: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की चीन यात्रा के दौरान जारी किए गए 'ज्वाइंट स्टेटमेंट' पर भारत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का जिक्र करने पर भारत ने चीन और पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए स्पष्ट किया है कि ये दोनों केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य अंग हैं और हमेशा रहेंगे। विदेश मंत्रालय ने दो टूक शब्दों में कहा है कि किसी भी दूसरे देश को भारत के आंतरिक मामलों पर कमेंट करने का कोई अधिकार नहीं है।

CPEC के नाम पर कब्जे को सही ठहराना बर्दाश्त नहीं
विदेश मंत्रालय ने तथाकथित चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के प्रोजेक्ट्स पर भी गहरी आपत्ति जताई है। भारत का कहना है कि ये प्रोजेक्ट्स भारत के संप्रभु इलाके (PoK) में हैं,। भारत ने चीन और पाकिस्तान के उन तमाम कदमों को खारिज कर दिया है, जो पाकिस्तान के इन इलाकों पर गैर-कानूनी और जबरदस्ती के कब्जे को सही ठहराने की कोशिश करते हैं। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय एकता से खिलवाड़ करने वाली ये बातें चीनी और पाकिस्तानी अधिकारियों को कई बार साफ-साफ बताई जा चुकी हैं।

जब बॉर्डर ही नहीं मिलता, तो कैसा 'पानी का सहयोग'?
चीन और पाकिस्तान के बीच 'ट्रांस-बाउंड्री वॉटर रिसोर्स कोऑपरेशन' के जिक्र को भारत ने पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने तर्क दिया कि चूंकि चीन और पाकिस्तान की कोई साझा सीमा (Boundary) नहीं है इसलिए उनके बीच सीमा पार जल सहयोग का सवाल ही पैदा नहीं होता। भारत ने यह भी साफ कर दिया कि उसने 1963 के तथाकथित बाउंड्री एग्रीमेंट को कभी मान्यता नहीं दी है।

आतंकवाद पर चीन का 'दोगला' रुख
शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद जारी साझा बयान में चीन ने कहा कि वह पाकिस्तान की 'आतंकवाद के खिलाफ' लड़ाई में साथ देगा, जिसे भारत ने हास्यास्पद बताया है। बयान में फिर से कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के जरिए हल करने की पुरानी रट लगाई गई, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है।


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Content Writer

Pardeep

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