संसद में राघव चड्डा ने पति-पत्नी के लिए ''Joint ITR'' की रखी मांग, कहा- एक छत, एक रसोई तो टैक्स अलग क्यों?
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 06:54 PM (IST)
नेशनल डेस्क: राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सोमवार को संसद में सरकार से विवाहित जोड़ों के लिए Optional Joint ITR Filing की सुविधा शुरू करने की बात कही है। चड्ढा का तर्क देते हुए कहा कि मौजूदा टैक्स व्यवस्था उन परिवारों के साथ अन्याय करती है जहाँ कमाई का वितरण असमान है।
राघव चड्ढा ने दिया ये उदाहरण
राघव चड्ढा ने दो परिवारों के उदाहरण से समझाया कि कैसे वर्तमान सिस्टम एक ही बजट वाले घरों से अलग-अलग टैक्स वसूलता है। चड्ढा ने उदाहरण देते हुए कहा कि नया टैक्स रिजीम ₹12 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री रखता है। परिवार A में दोनों की आय सीमा के अंदर है, इसलिए टैक्स जीरो है। लेकिन परिवार B में, जहाँ एक जीवनसाथी बच्चे की परवरिश के लिए घर पर है, वहां सरकार ₹1.92 लाख टैक्स वसूल रही है। एक छत, एक रसोई और एक बजट होने के बावजूद टैक्स के समय पति-पत्नी 'अजनबी' क्यों मान लिए जाते हैं?"
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In Parliament today I proposed optional Joint filing of Income Tax Returns for married couples.
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) March 16, 2026
Family A
Both spouses earn ₹10 lakh each.
Total household income is ₹20 lakh.
Tax: zero
Family B
One spouse earns ₹20 lakh. The other stays home to raise their child.
Total… pic.twitter.com/eU4OkQmBoW
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परिवार को टैक्स यूनिट क्यों नहीं मानती सरकार?
सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी पोस्ट कर कहा कि टैक्स के समय 'परिवार' शब्द गायब हो जाता है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि यदि 'ज्वाइंट फाइलिंग' की अनुमति दी जाए, तो परिवार B को भी परिवार A की तरह जीरो टैक्स का लाभ मिल सकेगा। इससे उन महिलाओं या पुरुषों को राहत मिलेगी जो परिवार के लिए अपना करियर त्याग देते हैं।
नया नहीं है यह प्रस्ताव, ICAI भी कर चुका है मांग
शादीशुदा जोड़ों के लिए संयुक्त कराधान (Joint Taxation) का विचार नया नहीं है। इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) पिछले दो वर्षों से अपने प्री-बजट ज्ञापनों में इस सुविधा की मांग कर रहा है। बजट 2026 से पहले भी कई विशेषज्ञों ने इसकी वकालत की थी।

सरकार का रुख
फिलहाल सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया है, इसके लिए विशेषज्ञों और विपक्ष की ओर से यह मांग उठ रही है, लेकिन सरकार ने फिलहाल इसे स्वीकार नहीं किया है। आपको बता दें कि बजट 2026 या फाइनेंस बिल 2026 में ऐसी किसी सुविधा का जिक्र नहीं है। ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 में भी फिलहाल 'इंडिविजुअल फाइलिंग' की ही व्यवस्था है। विशेषज्ञों का मानना है कि 'ज्वाइंट फाइलिंग' से टैक्स चोरी कम हो सकती है और परिवारों की डिस्पोजेबल इनकम (खर्च करने योग्य आय) बढ़ सकती है, जो अंततः अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद होगा।
