''तैयारी ही डर का है सबसे बड़ा इलाज'', AI से नौकरियों पर खतरे को लेकर PM मोदी ने युवाओं को दिया जीत का मंत्र

punjabkesari.in Wednesday, Feb 18, 2026 - 12:39 AM (IST)

नेशनल डेस्कः इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 की शुरुआत हो चुकी है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर युवाओं की चिंताओं, संभावनाओं और चुनौतियों पर विस्तार से बात की। न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में पीएम ने कहा कि एआई से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि इसके लिए तैयारी करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि एआई भविष्य की समस्या नहीं, बल्कि आज की जरूरत है। इसलिए सरकार लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग (नए कौशल सिखाने) में निवेश कर रही है।

AI शिखर सम्मेलन का उद्देश्य क्या है?

पीएम मोदी ने कहा कि एआई आज मानव सभ्यता के एक अहम मोड़ पर खड़ा है। यह लोगों की क्षमताओं को अभूतपूर्व तरीके से बढ़ा सकता है, लेकिन इसके लिए सही दिशा-निर्देशन जरूरी है।

उन्होंने कहा:“टेक्नोलॉजी का अंतिम लक्ष्य ‘सभी का कल्याण और सभी की खुशी’ होना चाहिए।” समिट का फोकस केवल नई तकनीक बनाने पर नहीं, बल्कि ऐसे परिणाम लाने पर है जो समाज के लिए फायदेमंद हों। यह शिखर सम्मेलन “पीपुल्स, प्लैनेट और प्रोग्रेस” यानी लोगों, पर्यावरण और विकास पर आधारित है। भारत चाहता है कि एआई का लाभ सिर्फ कुछ देशों या लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया के हर वर्ग तक पहुंचे। पहले वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन के रूप में भारत एक ऐसा मंच तैयार कर रहा है जो कम प्रतिनिधित्व वाले देशों और समुदायों की आवाज को भी मजबूती दे।

युवाओं में नौकरी जाने का डर – सरकार क्या कर रही है?

पीएम मोदी ने माना कि युवाओं के मन में एआई को लेकर नौकरी जाने की चिंता है। उन्होंने कहा: “डर का सबसे अच्छा इलाज तैयारी है।” सरकार एआई आधारित भविष्य के लिए युवाओं को नई स्किल्स सिखा रही है। डिजिटल ट्रेनिंग, टेक्निकल एजुकेशन और नई टेक्नोलॉजी में प्रशिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इतिहास गवाह है – जब भी नई तकनीक आई है, कुछ नौकरियों का स्वरूप बदला है, लेकिन नई तरह की नौकरियां भी पैदा हुई हैं। एआई डॉक्टरों, शिक्षकों और वकीलों को ज्यादा लोगों तक पहुंचने में मदद करेगा। इससे काम खत्म नहीं होगा, बल्कि काम करने का तरीका बदलेगा।

विकसित भारत 2047 में एआई की भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने में एआई की बहुत बड़ी भूमिका होगी। स्वास्थ्य सेवाओं में एआई पहले से ही असर दिखा रहा है। उदाहरण के तौर पर, डेयरी ब्रांड अमूल हजारों गांवों में फैली 36 लाख महिलाओं तक पहुंचने के लिए एआई का उपयोग कर रहा है। जब दुनिया एआई से असमानता बढ़ने की चिंता कर रही है, तब भारत एआई का उपयोग असमानता कम करने के लिए कर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि एआई के जरिए हर गांव, हर जिले और हर नागरिक तक स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक अवसर पहुंचें।

एआई को लेकर क्या चिंताएं हैं?

पीएम मोदी ने कहा कि एआई में पूर्वाग्रह (Bias) और सीमाओं से जुड़ी चिंताएं आज भी प्रासंगिक हैं। एआई सिस्टम कभी-कभी अनजाने में लिंग, भाषा या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में इन मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा विषय है जिसके लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

एआई के गलत इस्तेमाल से कैसे निपटेगा भारत?

प्रधानमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी एक शक्तिशाली साधन है, लेकिन इसका इस्तेमाल मानवता की भलाई के लिए होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय लेने की जिम्मेदारी हमेशा इंसानों के पास रहनी चाहिए। उन्होंने एआई के लिए कुछ जरूरी सिद्धांत बताए:

  • प्रभावी मानवीय निगरानी

  • सुरक्षा-आधारित डिजाइन

  • पारदर्शिता

  • डीपफेक, अपराध और आतंकवाद में एआई के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध

उन्होंने कहा कि एआई के सही उपयोग और नियंत्रण के लिए वैश्विक समझौते की जरूरत है।

भारत का आईटी सेक्टर और एआई का भविष्य

पीएम मोदी ने कहा कि एआई भारत के आईटी सेक्टर के लिए अवसर और चुनौती दोनों है। उन्होंने साफ किया कि एआई आईटी सेक्टर को खत्म नहीं कर रहा, बल्कि उसे बदल रहा है। सरकार ने इंडिया एआई मिशन के तहत एक व्यापक रणनीति बनाई है, ताकि भारत सिर्फ सेवाएं देने वाला देश न रहे, बल्कि एआई उत्पाद, प्लेटफॉर्म और समाधान बनाने में भी अग्रणी बने। भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का बड़ा केंद्र है और सरकार चाहती है कि भारतीय युवा एआई युग में दुनिया का नेतृत्व करें।


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Content Writer

Pardeep

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