“फोर्स हटा देंगे, आप बस सरेंडर कर दीजिए…” पापा राव और डिप्टी CM विजय शर्मा की फोन कॉल ने बदली कहानी
punjabkesari.in Wednesday, Mar 25, 2026 - 10:46 PM (IST)
नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। वेस्ट बस्तर डिवीजन से जुड़े कुख्यात माओवादी कमांडर सुन्नम चंद्रैया उर्फ पापा राव ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया है। करीब 25 लाख रुपये के इनामी इस नक्सली के सरेंडर को राज्य में माओवाद के कमजोर पड़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
20 साल तक ‘मरा हुआ’ बताकर बचता रहा
बताया जा रहा है कि 56 वर्षीय पापा राव लंबे समय तक अपनी मौत की अफवाह फैलाकर सुरक्षा एजेंसियों से बचता रहा। लेकिन हाल के वर्षों में लगातार बढ़ते दबाव और शीर्ष नक्सली नेताओं के खत्म होने या आत्मसमर्पण करने के बाद उसने भी हथियार डालने का फैसला लिया। उसने एक स्थानीय माध्यम के जरिए राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा से संपर्क साधा, जिसके बाद सरेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
फोन पर बातचीत के बाद तय हुआ सरेंडर
सूत्रों के मुताबिक, गृहमंत्री और पापा राव के बीच बातचीत के दौरान सरेंडर की रूपरेखा तैयार की गई। इसमें सुरक्षा का भरोसा दिया गया और जल्द आत्मसमर्पण के लिए कहा गया।
हथियारों का जखीरा और नकदी भी सौंपी
24-25 मार्च 2026 को सुकमा जिले में हुए आत्मसमर्पण के दौरान पापा राव और उसके साथियों ने भारी मात्रा में हथियार जमा कराए। इनमें AK-47, इंसास और SLR राइफलें, ग्रेनेड लॉन्चर समेत अन्य हथियार शामिल थे। साथ ही लाखों रुपये नकद भी प्रशासन को सौंपे गए।
कई बड़े हमलों में रहा शामिल
पापा राव लंबे समय से माओवादी गतिविधियों में सक्रिय था और उसके खिलाफ दर्जनों मामले दर्ज थे। वह कई बड़े हमलों से जुड़ा रहा, जिनमें सुरक्षा बलों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
अन्य नक्सली भी आए मुख्यधारा में
इस सरेंडर के साथ कई अन्य माओवादी कैडर भी सामने आए, जिनमें वरिष्ठ सदस्य और महिला नक्सली भी शामिल हैं। यह संकेत है कि संगठन के अंदर टूटन बढ़ रही है।
सरकार का दावा: नक्सलवाद खत्म होने की ओर
गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह आत्मसमर्पण राज्य में नक्सलवाद के अंत की दिशा में बड़ा कदम है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए कहा कि अब हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का समय आ गया है। सरकार ने सरेंडर करने वालों के पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि उन्हें समाज में फिर से स्थापित किया जा सके।
