गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस पर पाकिस्तान जाएंगे 737 भारतीय सिख, 10 जून से शुरू होने वाली यात्रा के लिए वीजा जारी
punjabkesari.in Monday, Jun 08, 2026 - 06:55 PM (IST)
International Desk: गुरु साहिबान की धरती से जुड़े ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकने की इच्छा रखने वाले भारतीय सिख श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। पाकिस्तान ने गुरु अर्जन देव जी के शहीदी गुरुपर्व के अवसर पर 737 भारतीय सिख श्रद्धालुओं को वीजा जारी किया है, जिससे वे पाकिस्तान में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग ले सकेंगे। Pakistan High Commission द्वारा जारी बयान के अनुसार, भारतीय श्रद्धालु 10 जून से 19 जून 2026 तक पाकिस्तान में रहेंगे और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। यह वीजा भारत और पाकिस्तान के बीच धार्मिक स्थलों की यात्रा से संबंधित द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत जारी किए गए हैं।
श्रद्धालु पाकिस्तान में स्थित उन ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन करेंगे, जो Guru Arjan Dev Ji के जीवन, शिक्षाओं और शहादत से जुड़े हुए हैं। गुरु अर्जन देव जी सिख इतिहास में त्याग, सेवा, सहिष्णुता और आध्यात्मिकता के प्रतीक माने जाते हैं। उनकी शहादत को सिख इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है।
हर वर्ष आयोजित होने वाली यह यात्रा भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले प्रमुख धार्मिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में से एक है। इसके माध्यम से भारतीय सिख श्रद्धालुओं को पाकिस्तान स्थित अपने पवित्र धार्मिक स्थलों के दर्शन करने का अवसर मिलता है। विशेष रूप से Gurdwara Dera Sahib और अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों में आयोजित कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
हालांकि भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों में समय-समय पर तनाव देखने को मिलता है, लेकिन धार्मिक यात्राओं को लेकर दोनों देशों के बीच विशेष व्यवस्थाएं लागू हैं। इन्हीं व्यवस्थाओं के तहत सिख, हिंदू और अन्य धार्मिक समुदायों के श्रद्धालुओं को पवित्र स्थलों की यात्रा के लिए वीजा जारी किए जाते हैं। 737 श्रद्धालुओं को वीजा जारी होने के बाद सिख संगतों में खुशी का माहौल है। गुरु अर्जन देव जी के शहीदी गुरुपर्व पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकना लाखों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय माना जाता है। यह यात्रा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपर्क को भी मजबूत करती है।
