Super Typhoon Dolphin: तबाही का खतरा- 175 KM प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा टाइफून डॉल्फिन, भारत के मानसून पर वैज्ञानिकों की नजर

punjabkesari.in Thursday, Aug 06, 2026 - 11:50 AM (IST)

नई दिल्ली: सुपर टाइफून डॉल्फिन जापान के दाइतो और रयूक्यू द्वीपों की ओर बढ़ रहा है। इसकी हवा की रफ्तार 175 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा है। यह तूफान जापान के लिए खतरनाक है, लेकिन भारत पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा। फिर भी मौसम वैज्ञानिक इस पर नजर रख रहे हैं, क्योंकि पश्चिमी प्रशांत महासागर में आने वाले बड़े तूफान कभी-कभी भारतीय मानसून को प्रभावित कर सकते हैं।

टाइफून डॉल्फिन इस समय मिनामिदाइतो द्वीप से लगभग 540 किलोमीटर दूर है और करीब 17 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है। इसमें तेज हवाएं और लगभग 210 किलोमीटर प्रति घंटे तक के झोंके दर्ज किए गए हैं। यह तूफान गुरुवार को दाइतो द्वीप और शुक्रवार को ओकिनावा के पास पहुंच सकता है। इसके कारण जापान के कई हिस्सों में भारी बारिश (100 से 200 मिमी, कहीं-कहीं 350 मिमी तक) और 10-11 मीटर ऊंची समुद्री लहरें उठ सकती हैं। हालांकि, जापान के अलावा मौसम वैज्ञानिक इस बात पर भी ध्यान दे रहे हैं कि यह तूफ़ान बड़े एशियाई मॉनसून सिस्टम के साथ कैसे इंटरैक्ट कर सकता है।

भारत के मानसून पर क्या होगा असर?
जब प्रशांत महासागर में बहुत शक्तिशाली टाइफून बनता है, तो वह वहां की हवा और नमी को अपनी ओर खींचता है। इससे बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव वाले सिस्टम कमजोर हो सकते हैं। बंगाल की खाड़ी में बनने वाले यही सिस्टम भारत में अच्छी बारिश लाने में मदद करते हैं। अगर ये सिस्टम कमजोर पड़ते हैं, तो कुछ समय के लिए भारत के कुछ हिस्सों में बारिश कम हो सकती है। हालांकि, मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ टाइफून डॉल्फिन के कारण भारत में लंबे समय तक मानसून कमजोर नहीं होगा। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तूफान कितने समय तक मजबूत रहता है और आगे किस दिशा में जाता है।

मौजूदा अनुमान मॉडल अलग-अलग राय रखते हैं, कुछ का अनुमान है कि यह वेनझोऊ के पास ज़मीन से टकराएगा, जबकि कुछ का मानना ​​है कि यह चीन के पूर्वी तट पर ताइझोऊ के ज़्यादा करीब टकराएगा।

भारत का मॉनसून अभी कई बड़े जलवायु कारकों से प्रभावित हो रहा है, जिनमें अल नीनो, इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) का बनना और बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाले सिस्टम का बार-बार बनना शामिल है। ऐसी स्थिति में, 'डॉल्फिन' कुछ समय के लिए खाड़ी के ऊपर नए मौसम सिस्टम के बनने को रोक सकता है, जिससे भारत के कुछ हिस्सों में बारिश में अस्थायी कमी आ सकती है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब टाइफून कमज़ोर पड़ जाएगा या उष्णकटिबंधीय क्षेत्र से दूर चला जाएगा, तो मॉनसून के फिर से मज़बूत होने की उम्मीद है। इससे बंगाल की खाड़ी एक बार फिर कम दबाव वाले सिस्टम के बनने के लिए अनुकूल हो जाएगी, जिससे पूरे देश में बारिश होती है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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