‘मेरा बेटा दो घंटे चिल्लाता रहा, लोग वीडियो बना रहे थे... 70 फीट गहरे गड्ढे में टेक्सी इंजीनियर की मौत, पिता बोले- प्रशासन की बड़ी लापरवाही
punjabkesari.in Monday, Jan 19, 2026 - 12:39 PM (IST)
नेशनल डेस्क: नोएडा के सेक्टर 150 में एक 70 फीट गहरे पानी भरे निर्माण गड्ढे में डूबने से गुरुग्राम के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई। उनके पिता, राजकुमार मेहता ने बताया कि उनका बेटा लगभग दो घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा।
शुक्रवार की रात, घने कोहरे और कम दृश्यता के बीच युवराज अपनी कार पर नियंत्रण खो बैठे और सड़क के मोड़ के पास निर्माण स्थल में बने जलभराव वाले गड्ढे में जा गिरे। हादसे के तुरंत बाद युवराज ने अपने पिता को कॉल कर जानकारी दी। राजकुमार और बचाव दल कुछ मिनटों में मौके पर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों के पास अपने बेटे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए जरूरी साधन नहीं थे।
राजकुमार मेहता ने आरोप लगाया, "मेरे बेटे ने मदद के लिए चिल्लाया, लेकिन वहां मौजूद लोग केवल देखते रहे और कुछ लोग वीडियो बना रहे थे। अधिकारी और स्टाफ भी मदद नहीं कर सके। उनके पास गोताखोर तक नहीं थे। पूरी घटना प्रशासन की लापरवाही को दिखाती है।" उन्होंने इस घटना के बाद कड़ी कार्रवाई और भविष्य में सुरक्षा उपायों को सख्त करने की मांग की।
युवराज, जो बिहार के सितामढ़ी के रहने वाले थे, गुरुग्राम की कंपनी डनहम्बी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में काम कर रहे थे। उनकी माता का दो साल पहले निधन हो चुका था और बहन UK में रहती हैं। हादसा उस समय हुआ जब गड्ढे पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और रोशनी नहीं थी। हादसे के दौरान युवराज कार की छत पर लगभग दो घंटे फंसे रहे, ताकि कार पूरी तरह डूब न जाए। उन्होंने अपने फोन की फ्लैश लाइट का उपयोग करके अपना स्थान दिखाया और लगातार मदद के लिए कॉल करते रहे।
जब कोई मदद के लिए गड्ढे में नहीं उतरा, तो एक फ्लिपकार्ट डिलीवरी एजेंट, मोनिंदर, ने अपनी जान जोखिम में डालकर रस्सी बांधकर युवराज को बचाने की कोशिश की। हालांकि, युवराज की जान नहीं बच पाई। लगभग 5 घंटे की कठिन बचाव कार्रवाई के बाद उनका शव और कार गड्ढे से बाहर निकाली गई।
युवराज के परिवार ने शिकायत दर्ज कराई कि सेवा मार्ग पर न तो रिफ्लेक्टर लगे थे और न ही नालियों को ढककर सुरक्षित बनाया गया था। इस शिकायत के बाद नोएडा प्राधिकरण ने एक जूनियर इंजीनियर की सेवाएं समाप्त कर दी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए।
नोएडा प्राधिकरण के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, सतीश पाल ने कहा कि जांच से पता चलेगा कि यह जमीन किसकी थी, किसे आवंटित की गई थी और रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
