Premanand Maharaj Ji : प्रेमानंद महाराज से मिले 9 नवनियुक्त IAS अधिकारी, डर और लालच से दूर रहकर सेवा करने का मिला गुरु मंत्र
punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 06:57 AM (IST)
नेशनल डेस्कः वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के दरबार में देश-विदेश से भक्त दर्शन और आशीर्वाद लेने आते हैं। खेल जगत, फिल्म इंडस्ट्री और समाज के कई बड़े नाम पहले भी उनसे आशीर्वाद ले चुके हैं। इसी कड़ी में हाल ही में 2024 बैच के 9 नवनियुक्त IAS अधिकारी प्रेमानंद महाराज से मिलने उनके आश्रम पहुंचे।
इन अधिकारियों में बैच की टॉपर शक्ति दुबे भी शामिल थीं। सभी अधिकारियों ने महाराज से आशीर्वाद लिया और अपने प्रशासनिक जीवन की शुरुआत के लिए मार्गदर्शन मांगा।
“सेवा की शुरुआत कर रहे हैं, हमें क्या ध्यान रखना चाहिए?”
IAS अधिकारियों ने प्रेमानंद महाराज से कहा कि उनकी सरकारी सेवा अभी शुरू हुई है। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा क्या करें और किन बातों का ध्यान रखें, जिससे वे ईमानदारी और निष्ठा के साथ भारत सरकार और देश की बेहतर सेवा कर सकें।
डर और लालच से बचने की सलाह
इस पर प्रेमानंद महाराज ने बहुत सरल लेकिन गहरा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि डर (भय) और लालच (प्रलोभन) इंसान को धर्म और सत्य के मार्ग से भटका देते हैं। अगर व्यक्ति डर और लालच से ऊपर उठकर अपने कर्तव्यों का पालन करे और भगवान का स्मरण करते हुए अपना काम ईमानदारी से करे, तो वही सच्ची भक्ति और सच्ची सेवा है।
गीता का उदाहरण देकर समझाया धर्म
प्रेमानंद महाराज ने नवनियुक्त अधिकारियों को भगवद गीता का ज्ञान भी दिया। उन्होंने कहा: “महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया और युद्ध के लिए प्रेरित किया। इसका अर्थ यह है कि भगवान ने जो कार्य या पद तुम्हें दिया है, उसे सही ढंग से निभाओ।” उन्होंने आगे समझाया कि पद मिलने का मतलब केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। भय या लालच में आकर अपने कर्तव्यों के विरुद्ध आचरण नहीं करना चाहिए।
गलत फैसले धर्म के खिलाफ
प्रेमानंद महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई अधिकारी लालच में आकर निर्दोष को सजा दे दे और दोषी को बचा ले, तो यह अधर्म कहलाता है। उन्होंने कहा कि भले ही दुनिया यह न देखे, लेकिन भगवान सब कुछ जानते हैं, क्योंकि वह सर्वज्ञ हैं।
सादा जीवन, सच्ची सेवा
महाराज ने आज के हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि: आज कई लोग अपने पद का दुरुपयोग करके पैसा और भोग-विलास इकट्ठा करने में लगे हैं लेकिन अगर कोई व्यक्ति धर्म के मार्ग पर चलते हुए,सादा जीवन जीए, नमक-रोटी में संतोष रखे,साधारण वेशभूषा अपनाए और नाम-जप पर विश्वास रखे। तो वह पूरी निष्ठा के साथ राष्ट्र की सेवा कर रहा है।
भगवान की सेवा ही राष्ट्र सेवा
प्रेमानंद महाराज ने अंत में कहा कि: “जब आप ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, तो आप सिर्फ देश की नहीं, बल्कि भगवान की भी सेवा कर रहे होते हैं, क्योंकि भगवान ही इस पूरी सृष्टि के रचयिता हैं।”
