Safe Night Driving: अब एक्सीडेंट से पहले मिलेगा अलर्ट, हाईवे पर NHAI का बड़ा कदम

punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 06:05 PM (IST)

नेशनल डेस्क: भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने हाईवे पर रात के समय आवारा पशुओं की वजह से होने वाली जानलेवा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। 'रोड सेफ्टी मंथ 2026' के अंतर्गत शुरू की गई इस विशेष पहल में 'रियल-टाइम स्ट्रे कैटल सेफ्टी अलर्ट सिस्टम' का परीक्षण किया जा रहा है, जिसे फिलहाल राजस्थान के जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी हाईवे पर लागू किया गया है।

 इस प्रणाली की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दुर्घटना होने के बाद नहीं, बल्कि होने से पहले ही ड्राइवर को सतर्क कर देती है। जैसे ही कोई वाहन आवारा पशुओं के लिए संवेदनशील माने जाने वाले 'हाई-रिस्क ज़ोन' के करीब पहुंचता है, तो ड्राइवर के मोबाइल पर लगभग 10 किलोमीटर पहले ही एक फ्लैश मैसेज और वॉयस अलर्ट प्राप्त होता है। यह अलर्ट चालक को चेतावनी देता है कि आगे का क्षेत्र पशुओं की आवाजाही वाला है, इसलिए कृपया गति कम रखें। यात्रियों की सुविधा के लिए इसमें यह भी प्रावधान है कि एक ही व्यक्ति को आधे घंटे के भीतर दोबारा ऐसा संदेश नहीं भेजा जाएगा।

सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह कदम इसलिए भी क्रांतिकारी माना जा रहा है क्योंकि भारत में नेशनल हाईवे कुल सड़क नेटवर्क का मात्र 2 प्रतिशत होने के बावजूद करीब 30 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाओं के गवाह बनते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2024 में देश में सड़क हादसों में 1.77 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवाई, जो प्रतिदिन औसतन 485 मौतों के बराबर है। वहीं साल 2025 के शुरुआती छह महीनों में ही नेशनल हाईवे पर करीब 26,770 लोगों की मृत्यु हुई। इन भीषण आंकड़ों को देखते हुए पुराने साइन बोर्ड और रिफ्लेक्टर के बजाय अब मोबाइल लोकेशन-आधारित इस अलर्ट सिस्टम को गेम चेंजर माना जा रहा है।

Reliance Jio के सहयोग से विकसित यह तकनीक पुराने दुर्घटना आंकड़ों और फील्ड इनपुट पर आधारित है। यदि इस पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम सकारात्मक रहते हैं और हादसों की संख्या में कमी आती है, तो सरकार इसे पूरे देश के राजमार्गों पर विस्तार देने की योजना बना रही है, जिससे भारत की सड़क सुरक्षा नीति में एक बड़े और निर्णायक बदलाव की उम्मीद है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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