कश्मीर में अपना घर खोने के बाद, परिवार ने दिल्ली में हिट-एंड-रन हादसे में इकलौती संतान को भी खोया, सदमें में माता-पिता
punjabkesari.in Thursday, Jul 02, 2026 - 12:31 PM (IST)
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में हुए हिट-एंड-रन हादसे में 34 वर्षीय सार्थक मट्टू की मौत के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के माता-पिता ने एक भावुक वीडियो जारी कर आरोप लगाया है कि पुलिस जांच में लापरवाही हो रही है और आरोपी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं।
सार्थक के पिता सुरेंद्र मट्टू ने वीडियो में रोते हुए कहा कि उनका इकलौता बेटा 25 जून की सुबह गुरुग्राम से नोएडा जाते समय एक हादसे का शिकार हुआ, लेकिन समय पर मदद नहीं मिल पाई। उन्होंने आरोप लगाया, “हमारा बेटा सड़क पर मरने के लिए छोड़ दिया गया, लेकिन आरोपी आज भी आज़ाद घूम रहे हैं।”
आंसुओं को रोकते हुए, सार्थक के पिता सुरेंद्र मट्टू कहते हैं कि इकलौते बच्चे को खोने के बाद वे और उनकी पत्नी अंदर से मर चुकी हैं । उनका दावा है कि इस मामले के आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं । वीडियो में वे कहते हैं, 25 जून को हिट-एंड-रन मामले में हमारे इकलौते बच्चे की मौत हो गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। मुझे नहीं पता कि पुलिस विभाग क्या कर रहा है। जब उनकी पत्नी रो पड़ती हैं, तो वे आगे कहते हैं, वे खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि हम गम में डूबे हैं। उन्होंने मेरे बेटे को सड़क किनारे मरने के लिए छोड़ दिया था। इस जोड़े की अपील से सार्थक की मौत की जांच पर फिर से ध्यान गया है। परिवार ने सबूत इकट्ठा करने में देरी का आरोप लगाया है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अपने परिवार के अतीत के बारे में बताते हुए सुरेंद्र ने कहा कि वे कश्मीरी पंडित हैं जिनका घर जला दिया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि उस सदमे को बर्दाश्त न कर पाने के कारण उनके माता-पिता की मौत हो गई थी।
For the Mattoos of Gurugram, life took a cruel turn on June 25.
— Hate Detector 🔍 (@HateDetectors) July 1, 2026
Their only son, who was days away from his 34th birthday, was travelling to work on his bike when a speeding Thar took a sudden turn and rammed into him in South Delhi's Vasant Kunj. Sarthak Mattoo bled on the road… https://t.co/jAVT4UQLmj pic.twitter.com/1b5GCjyddU
परिवार ने घटना के बारे में आगे बताया है कि जिस एसयूवी (महिंद्रा थार) ने टक्कर मारी, वह मौके से नहीं रुकी और घायल को अस्पताल नहीं पहुंचाया गया। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों के ब्लड सैंपल 50 घंटे बाद लिए गए, जिससे नशे की पुष्टि पर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, पुलिस ने इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है।
सार्थक के सहकर्मी आकाश दीप चौधरी ने बताया कि उन्हें सुबह करीब 6:45 बजे एक राहगीर का कॉल आया, जिसने घायल की पहचान की मदद की। वे तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को भी सूचना दी, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही सार्थक की मौत हो चुकी थी।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, हादसे में शामिल वाहन कर्नाटक में पंजीकृत है और एक बेंगलुरु स्थित निजी कंपनी के नाम पर लीज पर था। जांच में सामने आया है कि वाहन सागर साह (29) को दिया गया था, जबकि उनके दोस्त अपूर्व सिंह (30) उस समय गाड़ी चला रहे थे। पुलिस ने अपूर्व सिंह को 27 जून को गिरफ्तार किया था, जिन्हें बाद में जमानत मिल गई। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मामला दर्ज किया है, जो लापरवाही से मौत से संबंधित है। परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली सरकार से अपील करते हुए मामले में तेज और सख्त कार्रवाई की मांग की है।
