नेपाल के नए 100 के नोट ने खड़ा किया विवाद, भारत के 3 इलाकों को बताया अपना
punjabkesari.in Friday, Nov 28, 2025 - 02:25 PM (IST)
नेशनल डेस्क : नेपाल के नए 100 के नोट ने भारत की टेंशन बढ़ा दी है
नेपाल के सेंट्रल बैंक ने नया 100 रुपये का नोट बाजार में उतारा है, लेकिन इस नोट के साथ पुराना सीमा विवाद फिर चर्चा में आ गया है। नोट पर छपे नक्शे में नेपाल ने लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने क्षेत्र में दिखाया है, जो वर्षों से उत्तराखंड के हिस्से के रूप में जाने जाते हैं। इसी वजह से इस कदम को दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
क्यों बदला गया नोट का नक्शा?
नेपाली नेशनल बैंक के अधिकारियों के मुताबिक, पहले भी 100 रुपये के नोट में नेपाल का मानचित्र छपता था, लेकिन अब इसे 2020 में जारी किए गए राजनीतिक नक्शे के अनुसार बदल दिया गया है। उसी नक्शे में तीनों विवादित इलाके नेपाल की सीमा में दिखाए गए थे। यही कारण है कि बदलाव केवल 100 रुपये के नोट तक ही सीमित है, क्योंकि बाकी मूल्य के नोटों में नक्शा नहीं होता।
नए नोट की खासियत
नए नोट के डिजाइन में -
- सामने की ओर बाईं तरफ माउंट एवरेस्ट की तस्वीर है।
- दाईं ओर राष्ट्रीय फूल का वॉटरमार्क दिया गया है।
- बीच में हल्के हरे रंग में नेपाल का विस्तारित नक्शा छापा गया है।
- इसके पास अशोक स्तंभ की आकृति है, जिसमें बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी का उल्लेख दिखता है।
- पीछे की ओर एक सींग वाला गैंडा बना है, जो नेपाल की जैव विविधता का प्रतीक है।
विवाद कैसे शुरू हुआ था?
यह विवाद 2020 में तब उभरा था, जब नेपाल की तत्कालीन सरकार ने नया राजनीतिक नक्शा जारी किया। इस नक्शे में महाकाली नदी के उद्गम क्षेत्र को आधार बनाते हुए लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को नेपाल की भूमि बताया गया था। नेपाल की संसद ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों और प्रशासनिक सच्चाई से मेल नहीं खाता। अब उसी नक्शे को नोट पर छापने से मामला फिर से संवेदनशील हो गया है।
सीमा विवाद की जड़ क्या है?
भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,850 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जो पांच भारतीय राज्यों से गुजरती है। दोनों देशों के बीच सीमा निर्धारण का आधार 1816 की सुगौली संधि है। विवाद की मूल वजह महाकाली नदी की मुख्य धारा को लेकर मतभेद हैं। भारत जिस धारा को नदी की मुख्य धारा मानता है, नेपाल उसे सहायक धारा बताता है। इसी भिन्नता के कारण दोनों देशों के दावे अलग-अलग हैं, और सीमा विवाद समय-समय पर उभरता रहता है।
नई करेंसी नोट पर विवादित नक्शा छापने के बाद विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में भारत–नेपाल संबंधों में इस मुद्दे पर और चर्चा तथा प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।
