NCERT बुक आउट ऑफ सेल! ''Corruption in the Judiciary'' वाले पाठ पर SC ने अपनाया सख्त रुख, भड़के CJI बोले- संस्था को बदनाम करना बर्दाश्त नहीं!
punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 05:55 PM (IST)
नेशनल डेस्क: NCERT की कक्षा 8 की नई Social Science की किताब को बिक्री से हटा लिया गया है। इस किताब में Corruption in the Judiciary पर एक विशेष सेक्शन शामिल किया गया था, जिस पर अब कानूनी और प्रशासनिक विवाद छिड़ गया है और इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी देते हुए कहा
बुधवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस मामले में 'सुप्रीम कोर्ट' की ओर से स्वत: संज्ञान (Suo Moto) लेते हुए कार्यवाही शुरू की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि न्यायपालिका जैसी संस्था की गरिमा को ठेस पहुँचाने की अनुमति किसी को नहीं दी जाएगी। सीजेआईCJI सूर्यकांत ने कहा "मैं इस मामले से पूरी तरह अवगत हूँ। यह पूरे संस्थान बार और बेंच दोनों की चिंता का विषय है। मुझे लगातार कॉल और संदेश मिल रहे हैं। मैं स्पष्ट कर दूँ कि कोई कितना भी ऊँचा क्यों न हो, मैं इस संस्थान को बदनाम नहीं होने दूँगा।"
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The National Council of Educational Research and Training’s (NCERT) new Class 8 Social Science textbook, which had a section on “corruption in the judiciary”, has been pulled out of sale, sources in the NCERT confirmed to ANI
— ANI (@ANI) February 25, 2026
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वरिष्ठ वकीलों ने भी उठाए सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट के सामने यह दलील दी कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जा रहा है जैसे भ्रष्टाचार केवल न्यायपालिका में ही है। उन्होंने तर्क दिया कि किताब में नौकरशाही या राजनीति में व्याप्त भ्रष्टाचार पर एक शब्द भी नहीं लिखा गया है। कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर भी अपना विरोध दर्ज कराते हुए लिखा "एनसीईआरटी ने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को शामिल किया, लेकिन नेताओं, मंत्रियों, लोक सेवकों और जांच एजेंसियों के भ्रष्टाचार का क्या? उन्हें कालीन के नीचे दबा दिया गया है।"
क्या था नया बदलाव?
पुराने संस्करणों में न्यायपालिका की संरचना और उसकी भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जाता था। हालांकि, नए अध्याय "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" में अदालती पदानुक्रम के अलावा न्यायपालिका के सामने आने वाली चुनौतियों, जैसे लंबित मामले और 'भ्रष्टाचार' को भी जोड़ा गया था।
बार एसोसिएशन का रुख
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने भी इसे चौंकाने वाला बताया। उन्होंने सवाल किया कि क्या एनसीईआरटी के पास उन 40% विधायकों और सांसदों पर कोई उप-अध्याय है जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड है?
