‘हाथ’ का साथ छोड़ रहे ‘अपने’! क्या डूबती नैया को पार लगा पाएंगे प्रशांत किशोर?

punjabkesari.in Monday, Apr 18, 2022 - 12:44 PM (IST)

नेशनल डेस्क: जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के आवास पर शनिवार को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पार्टी में शामिल होने की इच्छा जताई और अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति का खाका पेश किया। पार्टी उनकी ओर से पेश की गई योजना पर विचार करने के लिए नेताओं का एक समूह बनाएगी, जो एक सप्ताह के भीतर सोनिया गांधी को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व किशोर की इस चुनावी रणनीति और उनके पार्टी से जुड़ने के बारे में जल्द फैसला करेगा। 

कांग्रेस छोड़ रहे कई बड़े नैता 
वहीं सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या प्रशांत 2024 तक कांग्रेस में जान फूंक सकते हैं ताकि वह भाजपा को टक्कर देने की स्थिति में पहुंच जाए? मौजूदा वक्त में कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। उसका दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। हताशा और शीर्ष नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद की वजह से कई दिग्गज नेता पार्टी छोड़ चुके हैं और आने वाले समय में कई और ऐसा कर सकते हैं। पिछले पांच साल में सबसे ज्‍यादा नेता अगर किसी पार्टी ने खोए हैं तो वह कांग्रेस है। राहुल गांधीकी कोर टीम भी पूरी तरह बिखर चुकी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया और जितिन प्रसाद पहले ही ‘कमल’ का दामन थाम चुके हैं। ऐसे में क्या महज दो सालों में प्रशांत किशोर सबकुछ दुरुस्त कर पाएंगे? 

बैठक में कई बड़े नेता हुए शामिल
कांग्रेस नेताओं के साथ प्रशांत किशोर की बैठक के बाद पार्टी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘प्रशांत किशोर ने कांग्रेस अध्यक्ष को 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति को लेकर विस्तृत प्रस्तुति दी। जो योजना उन्होंने सामने रखी है, उस पर पार्टी का एक समूह विचार करेगा और एक सप्ताह के भीतर कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद इस पर अंतिम फैसला होगा।'' यह पूछे जाने पर कि किशोर किस भूमिका में कांग्रेस के लिए काम करेंगे, तो वेणुगोपाल ने कहा कि सारी जानकारी एक सप्ताह में सामने आ जाएगी। बैठक में सोनिया गांधी के अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, के.सी. वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता अंबिका सोनी, मल्लिकार्जुन खड़गे और कुछ अन्य नेता शामिल हुए। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, किशोर ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष कहा कि वह ‘किसी अकांक्षा के बिना' कांग्रेस में शामिल होने के लिए तैयार हैं और वह कुछ नहीं चाहते हैं, लेकिन उनकी योजना पर अमल होना चाहिए, ताकि कांग्रेस जमीनी स्तर पर मजबूत हो सके।

सूत्रों का कहना है कि किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष अगले लोकसभा चुनाव की रणनीति का जो खाका रखा है उसमें कांग्रेस की मीडिया रणनीति में बदलाव करने, संगठन को मजबूत करने और उन राज्यों में विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया है, जहां कांग्रेस भाजपा के सीधे मुकाबले में है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया, ‘‘प्रशांत किशोर ने जो योजना पेश की है, उस पर अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान करेगा। वह कांग्रेस के लिए किस भूमिका में काम करेंगे, इस पर बहुत जल्द फैसला होने की उम्मीद है। वैसे, पार्टी में यह राय जरूर है कि किशोर को कांग्रेस में शामिल होना चाहिए।'' कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि पिछले कई हफ्तों से पार्टी नेतृत्व और किशोर के बीच मुख्य रूप से गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर बातचीत चल रही है।

पार्टी गुजरात के एक जाने-माने पाटीदार चेहरा नरेश पटेल को भी साथ लेने का प्रयास कर रही है। प्रशांत किशोर पिछले कुछ वर्षों से कांग्रेस नेतृत्व के साथ लगातार संपर्क में हैं। हाल में उन्होंने कहा था कि वह 2021 में कांग्रेस में शामिल होने वाले थे, लेकिन कुछ बिंदुओं पर सहमति नहीं बन सकी। मूल रूप से बिहार से ताल्लुक रखने वाले किशोर अगर कांग्रेस में शामिल होते हैं तो वह दूसरी बार सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगे। इससे पहले, वह कुछ समय के लिए जनता दल (यूनाइटेड) से जुड़े थे, हालांकि बाद में इससे अलग हो गए। वह पिछले करीब एक दशक से चुनावी रणनीतिकार के तौर पर काम कर रहे हैं। 

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी के सफल चुनावी अभियान के बाद किशोर सुर्खियों में आए थे। उन्होंने 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजद-जद(यू)-कांग्रेस के महागठबंधन की चुनावी जीत में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, 2019 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी, तथा 2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में द्रमुक के लिए काम किया। इन चुनाव अभियानों में भी वह सफल रहे। हालांकि, 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिये बतौर चुनावी रणनीतिकार उन्हें कामयाबी नहीं मिली थी। 


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Content Writer

Anil dev

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