मैसूर सिल्क साड़ियों का जबरदस्त क्रेज! 25 हजार से 3 लाख तक की कीमत, फिर भी सुबह 4 बजे से लाइन में खड़ी महिलाएं
punjabkesari.in Tuesday, Jan 20, 2026 - 10:17 PM (IST)
नेशनल डेस्कः असली मैसूरु सिल्क साड़ियों की दीवानगी इतनी ज़्यादा है कि कामकाजी दिनों में भी महिलाएं सुबह 4 बजे से ही कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम के बाहर लाइन में लग जाती हैं, जबकि शोरूम सुबह 10 बजे खुलता है। मंगलवार को भी बेंगलुरु स्थित केएसआईसी शोरूम में भारी भीड़ देखने को मिली।
भले ही इन साड़ियों की कीमत 25,000 रुपये से शुरू होकर 3 लाख रुपये से भी अधिक हो, लेकिन इसके बावजूद महिलाओं का उत्साह और आकर्षण कम नहीं होता। ये साड़ियां सिर्फ महंगी होने की वजह से नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन क्वालिटी, शुद्धता और सदियों पुरानी विरासत के कारण महिलाओं के दिलों में खास जगह बनाए हुए हैं।
GI टैग वाली मैसूर सिल्क साड़ियों की खास पहचान
अधिकारियों के अनुसार, केएसआईसी द्वारा बेची जाने वाली मैसूरु सिल्क साड़ियों पर GI (Geographical Indication) टैग होता है, जो उनकी शुद्धता और असल पहचान की गारंटी देता है। हर ज़री वाली साड़ी पर एक खास कोड और होलोग्राम लगा होता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि साड़ी असली है। कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) देश का एकमात्र ऐसा सरकारी संगठन है, जो रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया—कोकून से लेकर तैयार साड़ी तक—की खुद निगरानी करता है।
एक ही छत के नीचे पूरी प्रक्रिया
केएसआईसी शोरूम और फैक्ट्रियों में रेशम के कीड़ों के कोकून से धागा निकालने, उसे रंगने और फिर अलग-अलग डिज़ाइन व पैटर्न में बुनने तक का सारा काम एक ही छत के नीचे किया जाता है। कॉर्पोरेशन अपनी वेबसाइट पर साफ़ तौर पर बताता है कि वह केवल उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक रेशम और 100 प्रतिशत शुद्ध सोने की ज़री का ही इस्तेमाल करता है। केएसआईसी के मुताबिक, इस ज़री की खासियत यह है कि यह कभी काली नहीं पड़ती और सालों इस्तेमाल के बाद भी इसकी चमक बरकरार रहती है।
STORY | Women queue from dawn for GI-tagged Mysuru silk saris in Bengaluru
— Press Trust of India (@PTI_News) January 20, 2026
The demand for authentic Mysuru silk drew women to the KSIC showroom as early as 4 am on a working day, even though the store opens at 10 am.
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शोरूम में साड़ियों के लिए लंबी कतारें
बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा रोड पर स्थित केएसआईसी शोरूम में भीड़ को संभालने के लिए लाइन में खड़े ग्राहकों को टोकन दिए जाते हैं। एक टोकन पर ग्राहक को सिर्फ एक ही साड़ी खरीदने की अनुमति होती है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग साड़ी खरीद सकें। आमतौर पर शनिवार को शोरूम में करीब 50 साड़ियां उपलब्ध होती हैं, जो ज़्यादातर सोमवार सुबह तक बिक जाती हैं। पिछले हफ्ते शोरूम में करीब 60 साड़ियां रखी गई थीं, जिनमें से कुछ बेहद महंगी साड़ियों को छोड़कर बाकी सभी बिक गईं। यह जानकारी केएसआईसी के एक अधिकारी ने पीटीआई को दी।
सोशल मीडिया पर भी छाया मैसूर सिल्क का जुनून
शोरूम के बाहर लगी लंबी कतारों के वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। कई लोगों ने इसे परंपरा और शिल्प कौशल के प्रति सम्मान बताया, जबकि राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के एक यूजर ने लाइन का वीडियो शेयर करते हुए साड़ियों की सीमित आपूर्ति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मैसूर सिल्क के प्रोडक्ट पर केएसआईसी का आधिकारिक अधिकार है, इसलिए मांग के मुकाबले सप्लाई सीमित रहती है।
सिर्फ शॉपिंग नहीं, परंपरा और विरासत
कई महिलाओं के लिए केएसआईसी शोरूम से मैसूर सिल्क साड़ी खरीदना सिर्फ खरीदारी नहीं, बल्कि एक परंपरा, गर्व और विरासत से जुड़ा अनुभव है। यह बेंगलुरु और कर्नाटक की शाश्वत बुनकरी कला के प्रति महिलाओं के गहरे लगाव और सम्मान को दर्शाता है, जो पीढ़ियों से चला आ रहा है।
