म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में फंड फ्लो में बड़ा बदलाव: सितंबर में 1.33 लाख करोड़ रुपये का भारी आउटफ्लो, डेट फंड्स में मची भगदड़
punjabkesari.in Monday, Oct 12, 2026 - 01:10 PM (IST)
नई दिल्ली: एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के डेटा के अनुसार, सितंबर में भारत के म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में फंड फ्लो में बड़ा बदलाव देखा गया। अगस्त में 41,353 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो (निवेश) हुआ था, लेकिन सितंबर में 1.33 लाख करोड़ रुपये का नेट आउटफ्लो (निकासी) दर्ज किया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इक्विटी फंड में लगातार निवेश के बावजूद डेट-ओरिएंटेड स्कीम से भारी निकासी हुई।
इस कुल आउटफ्लो के साथ ही इंडस्ट्री की नेट एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी सितंबर के आखिर में घटकर 82.64 लाख करोड़ रुपये रह गई, जबकि पिछले महीने यह 87.08 लाख करोड़ रुपये थी। आउटफ्लो का सबसे बड़ा हिस्सा डेट-ओरिएंटेड स्कीम का था, जिसमें सितंबर में 1.83 लाख करोड़ रुपये की नेट निकासी हुई। यह अगस्त में दर्ज 8,127 करोड़ रुपये की निकासी से काफी ज़्यादा है। महीने के दौरान इंडस्ट्री के कुल नेगेटिव फंड फ्लो के पीछे डेट फंड से हुई निकासी ही मुख्य कारण थी।
इसके उलट, इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही और नेट इनफ्लो अगस्त के 29,328 करोड़ रुपये से बढ़कर सितंबर में 38,307 करोड़ रुपये हो गया। यह बढ़ोतरी इक्विटी फंड में निवेश की मजबूती को दिखाती है, जबकि व्यापक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में भारी नेट निकासी दर्ज की गई।
इक्विटी कैटेगरी में, स्मॉल-कैप फंड में सबसे ज़्यादा 9,039 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो हुआ, जो अगस्त में 7,973 करोड़ रुपये था। मिड-कैप फंड में 7,835 करोड़ रुपये का इनफ्लो दर्ज किया गया, जबकि पिछले महीने यह 6,989 करोड़ रुपये था। वहीं, फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेश 5,059 करोड़ रुपये से बढ़कर 6,702 करोड़ रुपये हो गया।
लार्ज-कैप फंड में भी सुधार हुआ और अगस्त में 1,147 करोड़ रुपये के आउटफ्लो के बाद सितंबर में 859 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो दर्ज किया गया। इस महीने सेक्टर और थीम पर आधारित फंड्स में 3,640 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो अगस्त में हुए 1,713 करोड़ रुपये के निवेश से दोगुने से भी ज़्यादा है।
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में भी निवेशकों की मांग बढ़ी; सितंबर में इनमें नेट इनफ्लो (शुद्ध निवेश) बढ़कर 4,451 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले महीने 2,597 करोड़ रुपये था। वहीं, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में निवेश लगभग उतना ही रहा-3,667 करोड़ रुपये-जबकि अगस्त में यह 3,671 करोड़ रुपये था।
सितंबर के आंकड़े भारत के म्यूचुअल फंड उद्योग में निवेश के अलग-अलग रुझानों को दिखाते हैं: इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम और गोल्ड ETFs में लगातार निवेश हो रहा है, जबकि डेट फंड्स से बड़ी मात्रा में पैसा निकाला जा रहा है। हालांकि कई कैटेगरी में इक्विटी में निवेश बढ़ा, लेकिन यह डेट-ओरिएंटेड स्कीम से बाहर निकले पैसे की भरपाई करने के लिए काफ़ी नहीं था।
आने वाले महीनों में म्यूचुअल फंड में निवेश के उतार-चढ़ाव पर बारीकी से नज़र रखी जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि सितंबर में डेट फंड्स से जो भारी निकासी हुई, वह निवेशकों के निवेश के तरीके में कोई अस्थायी बदलाव है या निवेश के पैटर्न में कोई स्थायी बदलाव।
