इनकम टैक्स के नोटिस इग्नोर करना महिला को पड़ा भारी, 1.55 करोड़ रुपये का टैक्स जुड़ा; अब ITAT ने दिया ये आदेश

punjabkesari.in Friday, Oct 02, 2026 - 11:29 PM (IST)

नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग के नोटिसों को लगातार नजरअंदाज करना दिल्ली की एक महिला के लिए मुसीबत का सबब बन गया। बैंक खातों में जमा भारी नकद रकम और प्रॉपर्टी खरीद के संबंध में भेजे गए नोटिसों का जवाब न देने पर आयकर विभाग ने महिला की आय में करीब 1.55 करोड़ रुपये का टैक्स एडिशन (Tax Addition) कर दिया। आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) ने मामले में प्रक्रियात्मक राहत देते हुए इसे दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है, लेकिन करदाताओं को नोटिस अनदेखा न करने की सख्त हिदायत दी है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला असेसमेंट ईयर 2020-21 का है। जसबिंदर कौर नाम की महिला ने 4 जनवरी 2021 को अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल कर अपनी वार्षिक आय 10.41 लाख रुपये दर्शाई थी। बाद में जांच के दौरान आयकर विभाग को उनके बैंक खातों में 21.90 लाख रुपये की नकद जमा और 74 लाख रुपये की संपत्ति खरीदने की जानकारी मिली। विभाग द्वारा रकम के स्रोत के संबंध में पूछे गए सवालों का महिला ने कोई जवाब नहीं दिया।

आगे की जांच में बैंकों से मिली जानकारी के मुताबिक महिला के खातों में कुल 80.94 लाख रुपये की नकद जमा और अन्य क्रेडिट पाए गए। इसमें से 34 लाख रुपये के लोन का हिसाब तो मिल गया, लेकिन बाकी बची रकम और 74 लाख रुपये की संपत्ति खरीद के बारे में कोई संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इसके आधार पर आयकर अधिकारी ने 1.55 करोड़ रुपये की टैक्स जोड़ कर दी।

CIT(A) ने 4 नोटिसों का जवाब न मिलने पर खारिज की थी अपील
कर निर्धारण आदेश के खिलाफ महिला ने आयकर आयुक्त (अपील) यानी CIT(A) के पास याचिका दायर की। हालांकि, CIT(A) द्वारा सुनवाई के लिए भेजे गए चार लगातार नोटिसों का भी महिला ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद CIT(A) ने अपील खारिज करते हुए आयकर अधिकारी द्वारा की गई 1.55 करोड़ रुपये की टैक्स जोड़ को सही ठहराया।

ITAT में महिला ने दी बीमारी की दलील, ट्रिब्यूनल ने दोबारा सुनवाई का दिया आदेश
इसके बाद महिला ने दिल्ली स्थित आयकर अपीलीय ट्रिब्यूनल (ITAT) का दरवाजा खटखटाया। ट्रिब्यूनल में महिला के वकील ने सफाई दी कि संपत्ति खरीदने के लिए होम लोन और रिश्तेदारों से मिली आर्थिक मदद का इस्तेमाल किया गया था। वकील ने बताया कि स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के कारण महिला पहले हुई कार्यवाहियों में शामिल नहीं हो सकी थीं।

मामले पर विचार करते हुए ITAT ने CIT(A) के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस भेज दिया। ITAT ने स्पष्ट किया कि CIT(A) को महज नोटिस का जवाब न मिलने के आधार पर अपील खारिज नहीं करनी चाहिए थी, बल्कि उपलब्ध दस्तावेजों व तथ्यों की जांच कर तर्कसंगत फैसला सुनाना चाहिए था।

करदाताओं के लिए बड़ी सीख: नोटिस इग्नोर करना पड़ेगा महंगा
हालांकि, ITAT ने अपने आदेश में यह बिल्कुल नहीं कहा कि 1.55 करोड़ रुपये का टैक्स एडिशन गलत है। महिला को अब बैंक स्टेटमेंट, लोन और संपत्ति खरीद से जुड़े सभी वैध दस्तावेज पेश करने होंगे। यदि वह फिर से नोटिस का जवाब देने में विफल रहती हैं, तो उनकी अनुपस्थिति में ही मामला तय कर दिया जाएगा।

इस मामले से सभी टैक्सपेयर्स के लिए यह बड़ी सीख मिलती है कि इनकम टैक्स विभाग से मिले किसी भी नोटिस को समय पर अटेंड करें। नोटिस को अनदेखा करने या जरूरी दस्तावेज न देने पर विभाग के पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर एकतरफा टैक्स देनदारी जोड़ी जा सकती है।


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Writer

Pardeep

Related News