₹1.25 करोड़ का मुंबई फ्लैट, चूल्हे के सामने बना टॉयलेट – वीडियो देख लोग रह गए दंग
punjabkesari.in Saturday, Jan 24, 2026 - 10:04 AM (IST)
नेशनल डेस्क: मुंबई में महंगे और छोटे घरों की चर्चा कोई नई बात नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस फ्लैट टूर ने सीमाओं को ही तोड़ दिया। इंस्टाग्राम यूज़र जयंतिका द्वारा शेयर किए गए वीडियो में एक ऐसे घर की झलक मिलती है, जिसकी कीमत करीब 1.2–1.25 करोड़ रुपये बताई जा रही है, मगर उसका लेआउट देखकर लोग सिर पकड़ रहे हैं। वीडियो की शुरुआत में जयंतिका एक छोटे, सजे-धजे से कमरे में खड़ी नज़र आती हैं। वह बताती हैं कि उन्होंने इसे पहले लॉबी समझ लिया था, लेकिन बाद में पता चला कि यही फ्लैट का ड्रॉइंग रूम है। यानी जो जगह मेहमानों के स्वागत के लिए होती है, वह पहली नज़र में एंट्री एरिया जैसी लगती है।
जब किचन और टॉयलेट आमने-सामने हों
असल झटका तब लगता है जब कैमरा किचन की ओर घूमता है। जयंतिका बताती हैं कि जहां चूल्हा रखा जाएगा, उसके ठीक सामने टॉयलेट बना हुआ है। यह सुनते ही वीडियो देखने वाले लोग चौंक जाते हैं। स्वच्छता और प्राइवेसी के लिहाज़ से यह व्यवस्था सवाल खड़े करती है, लेकिन मुंबई के महंगे घरों की मजबूरी शायद यहीं झलकती है। इसके बाद वह बेडरूम दिखाती हैं, जो इतना छोटा है कि बिस्तर रखने के बाद चलने की जगह लगभग खत्म हो जाती है। वीडियो के अंत में जयंतिका का एक वाक्य पूरी कहानी कह देता है— “मुंबई में कुछ भी चल रहा है।”
सोशल मीडिया पर हंसी, तंज और चिंता
वीडियो वायरल होते ही कमेंट सेक्शन मज़ेदार प्रतिक्रियाओं से भर गया। किसी ने लिखा कि बाथरूम, हॉल से बड़ा लग रहा है। एक यूज़र ने तंज कसते हुए कहा कि माचिस की डिब्बी में इससे ज़्यादा तीली आ जाती है। किसी ने मज़ाक में यह तक लिख दिया कि अब टॉयलेट सीट पर बैठकर उबलते दूध पर नज़र रखी जा सकती है। हालांकि हंसी के बीच कुछ लोगों ने चिंता भी जताई। एक कमेंट में लिखा गया कि लोग फिर भी ऐसे फ्लैट खरीद लेंगे, इसी वजह से बिल्डर ऐसे अजीब डिज़ाइन बनाते रहते हैं।
बड़ा सवाल: कीमत के बदले क्या मिल रहा है?
यह वायरल वीडियो केवल एक घर का टूर नहीं है, बल्कि मुंबई के रियल एस्टेट की उस सच्चाई को सामने लाता है, जहां करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी रहने की जगह समझौते का सौदा बन जाती है। सवाल यही है कि आसमान छूती कीमतों के बदले क्या लोगों को वाकई एक सम्मानजनक और सुविधाजनक घर मिल पा रहा है, या फिर मजबूरी में हर अजीब व्यवस्था को “मुंबई स्पेशल” कहकर स्वीकार करना पड़ रहा है?
