ऑनलाइन दवाओं के खिलाफ केमिस्टों का हल्ला बोल: 20 मई को देशभर में हड़ताल, 12 लाख से ज्यादा दुकानें रहेंगी बंद
punjabkesari.in Tuesday, May 19, 2026 - 02:11 AM (IST)
नेशनल डेस्कः ऑनलाइन फार्मेसी (E-Pharmacies) के विस्तार और दवाओं की ऑनलाइन बिक्री के विरोध में देशभर के केमिस्टों ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (AIOCD) के नेतृत्व में आगामी 20 मई 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया है। इस बड़े आंदोलन के कारण देश के करीब 12.4 लाख से अधिक निजी मेडिकल स्टोर बंद रहने की संभावना है, जिससे दवाओं की किल्लत पैदा हो सकती है।
इन मांगों को लेकर छिड़ा आंदोलन
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि वे ऑनलाइन दवाओं की गलत बिक्री, भारी डिस्काउंट, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से बनने वाले प्रिस्क्रिप्शन और पारंपरिक मेडिकल स्टोर मालिकों के हितों की रक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं। संगठन ने सभी केमिस्टों से इस लड़ाई में एकजुट और शांत रहने की अपील की है।
इमरजेंसी सेवाएं रहेंगी बहाल, अस्पतालों के पास मिलेगी दवा
हड़ताल के मद्देनजर सोमवार को दिल्ली ड्रग्स कंट्रोल विभाग और केमिस्ट एसोसिएशन के बीच एक अहम बैठक हुई। बैठक में निर्णय लिया गया कि हड़ताल के दौरान मरीजों, विशेषकर बुजुर्गों और गंभीर रोगियों को परेशानी न हो, इसके लिए बड़े अस्पतालों और इमरजेंसी क्षेत्रों के पास स्थित मेडिकल स्टोर खुले रखे जाएंगे। प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता पर कोई आंच न आए।
आम जनता के लिए सलाह: पहले ही खरीद लें दवाएं
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी रोज़ाना इस्तेमाल होने वाली ज़रूरी दवाएं 20 मई से पहले ही खरीद लें, ताकि हड़ताल के दौरान किसी भी आकस्मिक स्थिति से बचा जा सके।
कई राज्यों ने हड़ताल से बनाई दूरी
एक ओर जहां देशभर में बंदी का आह्वान है, वहीं दूसरी ओर पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के कुछ रिटेल फार्मेसी संगठनों ने इस हड़ताल में शामिल न होने का फैसला किया है। इन संगठनों ने लिखित रूप से स्पष्ट किया है कि वे मरीजों की सुविधा के लिए दवाइयों की सप्लाई सामान्य बनाए रखेंगे। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के अधिकारियों ने भी दोहराया है कि किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से निकाला जाना चाहिए और सार्वजनिक स्वास्थ्य उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
