मानसून सत्रः बाहर से नहीं आए मार्शल, सभापति एम वेकैंया नायडू को अधिकारियों ने बताया

08/12/2021 10:18:58 PM

नई दिल्लीः राज्यसभा में बुधवार को भारी हंगामे के दौरान हुई धक्का-मुक्की की घटना के एक दिन बाद उपसभापति एम वेंकैया नायडू ने उच्च सदन के अधिकारियों के साथ चर्चा की जिन्होंने उन्हें बताया कि सदन में किसी भी बाहरी को सुरक्षाकर्मी के तौर पर तैनात नहीं किया गया था। उपसभापति ने सरकार और विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की और 11 अगस्त को हुई घटना के बारे में उनकी राय भी सुनी।

नायडू ने राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों के साथ सदन में पिछले कुछ दिनों के भीतर हंगामे के दौरान हुई घटनाओं के बार में लगभग घंटे भर बैठक की। इस बैठक की चर्चा में बुधवार को सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का भी मुद्दा शामिल था। इस दौरान नायडू ने पूर्व में सदस्यों के नियम विरुद्ध आचरण, उसे लेकर गठित समितियों, उनकी रिपोर्ट और उन पर हुई कार्रवाई के बारे में जानाकरी मांगी।

सरकार ने हंगामे के दौरान विपक्षी सदस्यों के आचरण की जांच के लिए समिति गठित करने की मांग की थी। सूत्रों ने बताया कि इस सत्र में हुए हंगामे और सरकार की मांग के मद्देनजर समिति गठित करने को लेकर अभी चर्चा जारी है। सभापति ने सदन में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती को लेकर राज्यसभा अधिकारियों से जानकारी मांगी थी।

राज्यसभा सचिवालय ने एक बयान में कहा, ‘‘बाद में अधिकारियों ने नायडू को बताया कि 10 अगस्त को तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों में कोई बाहरी नहीं था।’’ उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय के कर्मियों को तैनात किया गया था। आवश्यकता के अनुरुप इन कर्मियों की तैनाती की मंजूरी है।’’

बयान में कहा गया, ‘‘उन्होंने बताया कि शुरुआत में सिर्फ 14 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था जिसे बढ़ाकर बाद में 42 कर दिया गया। सदन की स्थिति और पूर्व में हुए घटनाक्रमों को देखते हुए ऐसा किया गया।’’

नायडू ने विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वह कथित घटनाओं के मामले को देखेंगे जिसमें कुछ सदस्य और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। उन्होंने विपक्षी सदस्यों से सदन को सुचारू रूप से चलाने और उसकी गरिमा का ध्यान रखने का अनुरोध किया। उन्होंने विपक्षी नेताओं से कहा कि 10 अगस्त में सदन में जो कुछ भी हुआ उससे वह बहुत क्षुब्ध हैं और कुछ सदस्यों का ऐसा आचरण अक्षम्य है ओर उनके खिलाफ कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।

इससे पहले राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं ने संयुक्त बयान में कहा कि राज्यसभा में बुधवार को जो हुआ वह हैरान करने वाला, अप्रत्याशित, दुखद और सदन की गरिमा और सदस्यों का अपमान था...इस सरकार ने संसदीय लोकतंत्र के सम्मान को कम किया है। विपक्षी नेताओं ने यह दावा किया कुछ महिला सांसदों समेत सदन के कई सदस्यों के साथ ऐसे बाहरी लोगों ने धक्कामुक्की की, जो संसद की सुरक्षा का हिस्सा नहीं है। इस बयान पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रमुख शरद पवार, द्रमुक के टीआर बालू समेत 11 दलों के नेताओं के हस्ताक्षर हैं।


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Content Writer

Yaspal

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