मणिशंकर अय्यर का कांग्रेस पर तीखा हमला: बोले—पार्टी असहमति बर्दाश्त नहीं कर सकती तो पतन तय!
punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 08:50 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Mani Shankar Aiyar एक बार फिर अपने स्पष्ट और बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई संगठन असहमति को सहन नहीं कर सकता, तो वह लंबे समय तक टिक नहीं सकता। उनके मुताबिक, मतभेदों का शांत लेकिन मजबूत तरीके से जवाब देना ही लोकतांत्रिक पार्टी की पहचान होती है। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर जारी एक विस्तृत वीडियो संदेश में कांग्रेस के अतीत का हवाला देते हुए कहा कि पार्टी की ताकत विविध विचारों से आती रही है।
नेहरू से राजीव तक: असहमति की परंपरा
अय्यर ने Jawaharlal Nehru, Indira Gandhi और Rajiv Gandhi के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन समयों में विचारों की भिन्नता को पूरी तरह दबाया नहीं जाता था।उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस हमेशा कई विचारधाराओं और दृष्टिकोणों को साथ लेकर चलती रही है। अय्यर ने चेतावनी दी कि असहमति को खत्म करने की कोशिश पार्टी को कमजोर कर सकती है, जैसा कि आपातकाल के बाद के राजनीतिक घटनाक्रम से संकेत मिलता है।
राहुल गांधी से बयान दोहराने की मांग
अय्यर ने 5 मई 1989 को लोकसभा में दिए गए राजीव गांधी के उस भाषण का जिक्र किया, जिसमें धर्मनिरपेक्ष भारत की अनिवार्यता पर जोर दिया गया था। उन्होंने पार्टी नेतृत्व को चुनौती दी कि वे Rahul Gandhi से वही स्पष्ट रुख दोहराने को कहें। उनका कहना था कि पार्टी को अपने मूल सिद्धांतों को दोबारा मजबूती से सामने रखना चाहिए।
असहमति के ऐतिहासिक उदाहरण
उन्होंने राजीव गांधी के समय के नेताओं जैसे Arif Mohammad Khan, V. P. Singh और Arun Nehru का जिक्र किया, जिन्होंने अलग विचार रखे लेकिन लोकतांत्रिक दायरे में अपनी बात रखी। अय्यर के अनुसार, कांग्रेस की परंपरा रही है कि बहस और मतभेद से पार्टी मजबूत होती है। उन्होंने यह भी कहा कि ईमानदार असहमति और व्यक्तिगत स्वार्थ से प्रेरित असहमति में फर्क होता है।
पार्टी का जवाब
अय्यर की टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब उन्होंने हाल में केरल के मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan की प्रशंसा की थी। इसके बाद कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि अय्यर पार्टी की ओर से अधिकृत वक्ता नहीं हैं और उनकी राय व्यक्तिगत है। पार्टी ने यह भी दोहराया कि वे अपने आधिकारिक रुख से अलग किसी बयान की जिम्मेदारी नहीं लेती।
फिर उभरी अंदरूनी बहस
यह पूरा विवाद कांग्रेस के भीतर विचारधारात्मक बहस और नेतृत्व शैली को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर सामने ले आया है। ऐसे समय में जब पार्टी विपक्ष की भूमिका में खुद को मजबूत दिखाने की कोशिश कर रही है, यह बयान आंतरिक मतभेदों को उजागर करता है।
