ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान: निलंबित अधिकारियों को राज्य सरकार देगी सुरक्षा और प्रमोशन

punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 09:06 PM (IST)

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया ने सियासत को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने नबन्ना में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में Election Commission of India (ECI) पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने आयोग को “तुगलकी” बताते हुए कहा कि यह एक राजनीतिक एजेंडे के तहत काम कर रहा है और मतदाता सूची से नाम हटाने की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।

अधिकारियों को सुरक्षा का भरोसा

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि आयोग राज्य के अधिकारियों पर कार्रवाई करता है, तो राज्य सरकार उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी अधिकारी को पदावनत किया जाता है, तो राज्य उसे पदोन्नत करने पर भी विचार कर सकता है।

कैबिनेट के हालिया निर्णय का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि प्रोबेशन अवधि पूरी कर चुके और बीडीओ के रूप में सेवा दे चुके अधिकारियों को एसडीओ पद पर पदोन्नति देने का प्रावधान किया गया है। उनका कहना था कि राज्य प्रशासन को दबाव में नहीं आने दिया जाएगा।

दस्तावेजों को लेकर दोहरे मापदंड का आरोप

ममता बनर्जी ने SIR प्रक्रिया में दस्तावेजों की स्वीकृति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कुछ राज्यों में जिन दस्तावेजों को मान्यता दी गई, वही पश्चिम बंगाल में स्वीकार नहीं किए जा रहे। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद सूचीबद्ध कागजातों को समान रूप से मान्यता नहीं मिल रही। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है, जिससे चुनावी माहौल प्रभावित हो सकता है।

निलंबित अधिकारियों पर राज्य का रुख

हाल ही में आयोग ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोप में कुछ अधिकारियों को निलंबित किया था। राज्य सरकार का कहना है कि ये अधिकारी अन्य प्रशासनिक कार्यों में लगे रहेंगे और उनके खिलाफ अंतिम निर्णय जांच के बाद ही लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसे प्रक्रिया संबंधी मुद्दा बताते हुए कहा कि बिना पर्याप्त स्पष्टीकरण के कठोर कार्रवाई उचित नहीं है।

बढ़ता चुनावी तनाव

SIR को लेकर चल रहा यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। राज्य सरकार ने इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। आने वाले दिनों में यह टकराव चुनावी रणनीतियों और प्रशासनिक निर्णयों पर असर डाल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची का मुद्दा आगामी चुनाव की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।


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Ramanjot

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