मलेशिया को पसंद आया ब्रह्मोस; अमेरिका को छोड़ भारत से रक्षा साझेदारी की तैयारी, चीन की बढ़ेगी टेंशन

punjabkesari.in Sunday, Sep 20, 2026 - 07:47 PM (IST)

Kuala Lumpur: भारत और मलेशिया के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मलेशिया ने भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी संभावित खरीद से मलेशिया अपनी रक्षा जरूरतों के लिए अमेरिका और उसके सहयोगी देशों पर निर्भरता कम कर सकता है।  हालांकि अभी यह संभावित खरीद में रुचि है और इसे अंतिम रक्षा सौदा नहीं माना जा सकता। रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ कमलेश कुमार के अनुसार, भारत के साथ करीबी सहयोग मलेशिया को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सुरक्षा साझेदार उपलब्ध करा सकता है, बिना उसे किसी एक शक्ति खेमे में पूरी तरह जाने की जरूरत पड़े।

 

उनके मुताबिक, रक्षा साझेदारियों में विविधता लाना मलेशिया की रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखने का एक तरीका हो सकता है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता और बहुउपयोगिता को देखते हुए इसकी संभावित तैनाती से दक्षिण चीन सागर में मलेशिया की प्रतिरोधक क्षमता को लेकर दूसरे देशों की धारणा प्रभावित हो सकती है। दक्षिण चीन सागर में चीन और मलेशिया के बीच कुछ समुद्री क्षेत्रों को लेकर दावे जुड़े हुए हैं। विशेषज्ञ ने चेतावनी दी कि मलेशिया को किसी संभावित खरीद के उद्देश्य को लेकर स्पष्ट संदेश देना होगा, ताकि इसे किसी खास देश को निशाना बनाने की तैयारी के रूप में न देखा जाए। मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। मलेशिया ने इसमें साझेदार देश के रूप में भाग लिया।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद ब्रह्मोस प्रणाली में मलेशिया की रुचि की बात सामने आई। इसके बाद अनवर इब्राहिम ने भारत की अपनी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पूंजी निवेश और आर्थिक संबंधों को बढ़ाने पर भी जोर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, मलेशिया के भारत के साथ आर्थिक संबंधों में अभी काफी विस्तार की गुंजाइश है। सनवे विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर येह किम लेंग ने कहा कि मलेशिया का भारत के साथ आर्थिक रिश्ता अभी अपेक्षाकृत कम विकसित है। वर्ष 2025 में मलेशिया और भारत के बीच व्यापार करीब 79.3 अरब रिंगिट रहा। इसके मुकाबले अमेरिका और चीन के साथ मलेशिया का संयुक्त व्यापार 900 अरब रिंगिट से अधिक था। रणनीतिक सलाहकार एरिक लो के मुताबिक, मलेशिया-भारत संबंधों को मजबूत करने का उद्देश्य जरूरी नहीं कि चीन या अमेरिका से दूर जाना हो। इसके बजाय यह मलेशिया के लिए अपने आर्थिक और रणनीतिक विकल्पों का विस्तार करने का प्रयास हो सकता है।
 
  


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Content Writer

Tanuja

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