महाराष्ट्र: रत्नागिरी जिला परिषद में शिंदे गुट ने रचा इतिहास – 40 सीटों पर कब्जा, BJP 4 पर सिमटी

punjabkesari.in Monday, Feb 09, 2026 - 07:05 PM (IST)

नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र में जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव 2026 के नतीजे 9 फरवरी (सोमवार) को सामने आए और रत्नागिरी जिला परिषद ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल मचा दी। यहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 56 में से 40 सीटों पर जीत दर्ज की और परिषद में एकतरफा बहुमत हासिल कर लिया। यह जीत न सिर्फ रत्नागिरी में शिंदे गुट की मजबूत पकड़ दिखाती है, बल्कि राज्य की राजनीति में बदलते समीकरणों का भी बड़ा संकेत मानी जा रही है।

BJP को झटका, चौथे स्थान पर खिसकी

जहां महायुति गठबंधन (BJP + शिंदे शिवसेना + अजित पवार गुट) राज्य के कई जिलों में प्रभावशाली दिखा, वहीं रत्नागिरी में BJP का प्रदर्शन चौंकाने वाला रूप से कमजोर रहा। पार्टी को महज 4 सीटें मिलीं और वह चौथे स्थान पर सिमट गई।

रत्नागिरी जिला परिषद: सीटों का पूरा गणित (कुल 56)

  • शिवसेना (शिंदे गुट) – 40 सीटें
  • शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) – 6 सीटें
  • एनसीपी (अजित पवार गुट) – 5 सीटें
  • BJP – 4 सीटें
  • MNS – 1 सीट
  • कांग्रेस + एनसीपी (शरद पवार गुट) – 0 सीट

इस नतीजे ने साफ कर दिया कि रत्नागिरी में फिलहाल शिंदे गुट का दबदबा निर्विवाद है, जबकि विपक्ष को करारा झटका लगा है।

 मतदान प्रतिशत और आरक्षण की तस्वीर

रत्नागिरी जिले में 55.79% मतदान दर्ज किया गया, जो 12 जिलों में सबसे कम रहा। (राज्य का औसत मतदान: 68.28%)

सीटों का वर्गीकरण:

  • सामान्य वर्ग: 38 सीटें (18 महिला आरक्षित)
  • OBC: 15 सीटें (8 महिला आरक्षित)
  • SC: 2 सीटें (1 महिला)
  • ST: 1 सीट

कुछ तालुकों जैसे खेड़, चिपलुन, दापोली और गुहागर में OBC महिला आरक्षण लागू था, जबकि रत्नागिरी, संगमेश्वर, लांजा, राजापुर और मांडंगड में यह आरक्षण नहीं था।

इन जिलों में हुआ था मतदान

7 फरवरी 2026 को महाराष्ट्र के 12 जिलों में मतदान कराया गया था रायगढ़, रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग, पुणे, सातारा, सांगली, सोलापुर, कोल्हापुर, छत्रपति संभाजीनगर, परभणी, धाराशिव और लातूर।

राजनीतिक संकेत क्या कहते हैं?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रत्नागिरी का यह नतीजा आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले बड़ा संकेत है। शिंदे गुट की यह जीत यह दिखाती है कि जमीनी स्तर पर उनकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है, जबकि BJP और उद्धव गुट को रणनीति पर दोबारा सोचने की जरूरत पड़ सकती है।


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Ramanjot

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