टेक्सास में 90 फुट ऊंची हनुमान प्रतिमा पर बवाल; अमेरिकी यूट्यूबर बोला-जीतते ही इसे गिरा देंगे, मिला करारा जवाब
punjabkesari.in Tuesday, Sep 22, 2026 - 05:26 PM (IST)
Texas: अमेरिका के टेक्सास में भगवान हनुमान की 90 फीट ऊंची प्रतिमा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक विवाद खड़ा हो गया है। अमेरिकी यूट्यूबर और मैगा समर्थक जेसी ह्यूजेस ने प्रतिमा की तस्वीर साझा करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “जब हम जीतेंगे, तो इसे गिरा देंगे।” हालांकि, ह्यूजेस ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह किस जीत की बात कर रहे थे। उनके बयान की सोशल मीडिया पर आलोचना हुई है। जिस प्रतिमा को लेकर विवाद हुआ है, वह टेक्सास के शुगर लैंड स्थित श्री अष्टलक्ष्मी मंदिर परिसर में स्थापित ‘स्टैच्यू ऑफ यूनियन’ है। करीब 90 फीट ऊंची इस पंचधातु की हनुमान प्रतिमा का अगस्त 2024 में प्राण प्रतिष्ठा समारोह हुआ था। इसे हनुमान जी की शक्ति, भक्ति और एकता के प्रतीक के तौर पर स्थापित किया गया है।
7k likes for an argument the US military should prevent Americans from freely practicing their religion on private property. pic.twitter.com/K4Ktr5Shgs
— Chad Felix Greene 🇮🇱 (@chadfelixg) September 20, 2026
प्रतिमा के स्थापित होने के बाद भी कुछ ईसाई समूहों और रूढ़िवादी लोगों ने इसका विरोध किया था। अगस्त 2024 में एक स्थानीय चर्च समूह ने प्रतिमा के पास प्रदर्शन और धार्मिक प्रचार किया था। इसके बाद मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने और निगरानी कैमरे लगाने की तैयारी की थी। ह्यूजेस के बयान पर अमेरिकी सेना के पूर्व सैनिक रुचिर बख्शी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। खुद को हिंदू-अमेरिकी बताने वाले बख्शी ने कहा कि उन्होंने देश के लिए सैन्य सेवा इसलिए नहीं की थी कि कोई उनके धर्म को निशाना बनाने की बात करे। उन्होंने सोशल मीडिया पर धार्मिक स्वतंत्रता और सभी समुदायों के समान अधिकारों की बात उठाई।
बख्शी ने कहा कि उन्होंने ईसाइयों, यहूदियों, मुसलमानों, नास्तिकों और हिंदुओं के साथ सेना में सेवा की। उनके मुताबिक, अलग-अलग धर्मों के सैनिकों ने देश के लिए एक साथ काम किया और कुछ सैनिक युद्ध से कभी वापस नहीं लौटे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अमेरिका में किसी राजनीतिक जीत का मतलब किसी दूसरे धर्म के मंदिर को गिराना है, तो यह धार्मिक स्वतंत्रता की भावना के खिलाफ होगा। उन्होंने कहा कि हिंदू अमेरिकियों को भी वही धार्मिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए जो दूसरे धार्मिक समुदायों को प्राप्त है। 90 फीट ऊंची यह प्रतिमा वर्ष 2024 में स्थापित होने के बाद से ही चर्चा में रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, इसके उद्घाटन के कुछ समय बाद एक चर्च समूह ने इसका विरोध किया था। हालांकि उस समय प्रदर्शन हिंसक नहीं हुआ था और मंदिर प्रबंधन ने बाद में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया था।
