Lung Cancer: 2030 तक भारत में कहां बढ़ेगा फेफड़ों के कैंसर का खतरा, जानें कैसे कर सकते हैं बचाव
punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 06:42 PM (IST)
नेशनल डेस्क: दुनियाभर में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और भारत भी इससे अछूता नहीं है। हाल ही में Indian Journal of Medical Research (IJMR) में प्रकाशित एक स्टडी ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2030 तक फेफड़ों यानी लंग्स कैंसर के मामलों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि देश का नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है, जबकि महिलाओं में इस बीमारी की रफ्तार सबसे तेज रहने की आशंका जताई गई है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर एक गंभीर पब्लिक हेल्थ समस्या बन चुका है। साल 2022 में दुनियाभर में करीब 2 करोड़ नए कैंसर मामले सामने आए और लगभग 97 लाख लोगों की मौत हुई। आंकड़े यह भी बताते हैं कि हर पांच में से एक व्यक्ति को जीवन में कभी न कभी कैंसर हो सकता है।
आखिर लंग्स कैंसर होता क्या है
लंग्स कैंसर तब होता है, जब फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। ये खराब कोशिकाएं आपस में मिलकर गांठ या ट्यूमर बना लेती हैं। इससे फेफड़ों का सामान्य कामकाज प्रभावित होता है और समय के साथ बीमारी शरीर के अन्य अंगों तक भी फैल सकती है।
देश के किस हिस्से में सबसे ज्यादा खतरा
ICMR की नई स्टडी के मुताबिक, नॉर्थ-ईस्ट भारत में लंग्स कैंसर की दर सबसे ज्यादा रहने की संभावना है। चिंता की बात यह है कि यहां महिलाओं में इसके मामले पुरुषों के लगभग बराबर पहुंचते दिख रहे हैं।
स्टडी में देश के छह अलग-अलग क्षेत्रों की 57 आबादियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इनमें आइजोल सबसे ऊपर रहा, जहां पुरुषों में प्रति लाख आबादी पर 35.9 और महिलाओं में 33.7 मामले दर्ज किए गए। यहां लंग्स कैंसर से होने वाली मृत्यु दर भी सबसे अधिक पाई गई।
किन वजहों से बढ़ रहे हैं मामले
TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्थ-ईस्ट में तंबाकू का अत्यधिक इस्तेमाल अब भी एक बड़ा कारण है। इस क्षेत्र में पुरुषों में 68 प्रतिशत से ज्यादा और महिलाओं में करीब 54 प्रतिशत लोग तंबाकू का सेवन करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी का स्वरूप बदल रहा है। AIIMS के पल्मोनोलॉजी विभाग के डॉक्टर सौरभ मित्तल के अनुसार, “अब बिना स्मोकिंग करने वाली महिलाओं में भी फेफड़ों के कैंसर के मामले सामने आ रहे हैं। इसका संबंध इनडोर एयर पॉल्यूशन, बायोमास ईंधन, सेकेंड-हैंड स्मोक और काम से जुड़े प्रदूषण से हो सकता है।”
पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग ट्रेंड
स्टडी में यह भी सामने आया कि दक्षिण भारत के कन्नूर, कासरगोड और कोल्लम जैसे जिलों में पुरुषों में लंग्स कैंसर की दर ज्यादा है, जबकि यहां तंबाकू और शराब का सेवन अपेक्षाकृत कम माना जाता है।
दक्षिण भारत में महिलाओं के सबसे ज्यादा मामले हैदराबाद और बेंगलुरु में दर्ज किए गए। वहीं उत्तर भारत में श्रीनगर में पुरुषों में मामले ज्यादा पाए गए, जबकि श्रीनगर और पुलवामा में महिलाओं में भी कम नशे के बावजूद उच्च दर दर्ज की गई।
हर साल कितनी तेजी से बढ़ रहे हैं केस
रिपोर्ट के अनुसार, कुछ इलाकों में महिलाओं में लंग्स कैंसर के मामले हर साल करीब 6.7 प्रतिशत की दर से बढ़ रहे हैं, जबकि पुरुषों में यह बढ़ोतरी करीब 4.3 प्रतिशत है। तिरुवनंतपुरम में महिलाओं और डिंडीगुल में पुरुषों के मामलों में सबसे तेज उछाल दर्ज किया गया है।
कुल मिलाकर, यह स्टडी साफ संकेत देती है कि फेफड़ों का कैंसर आने वाले वर्षों में भारत के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन सकता है, खासकर महिलाओं और नॉर्थ-ईस्ट क्षेत्र में। समय रहते जागरूकता, प्रदूषण नियंत्रण और शुरुआती जांच ही इस खतरे को कम करने का सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकते हैं।23
